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ठुकराई माँ, छुपा आसमानवां33एपिसोड

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ठुकराई माँ, छुपा आसमान

नेहा सिन्हा, सुरक्षा दल की सबसे बड़ी सेनापति, एक प्यारी और ममतामयी माँ है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह बेहद सख्त भी बन सकती है। 25 साल पहले उन्होंने सात बच्चों को आग से बचाकर अपना बच्चा बनाकर पाला। अपनी 50वीं सालगिरह की पार्टी में, उन सातों बच्चों के असली माँ-बाप ने आकर उन्हें बहका दिया और बच्चे नेहा से अलग हो गए। अब नेहा चुप नहीं बैठेगी। वह अपनी असली पहचान सबके सामने रखकर अपनी ताकत दिखाएगी और सातों बच्चों का दिल फिर से जीतेगी, इस बार प्यार से नहीं, बल्कि उनके सामने खड़े होकर।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रक्त और रेशम का खेल

जब खून से सने होंठों पर मुस्कान खिलती है, तो समझ जाओ कि ठुकराई माँ, छुपा आसमान की दुनिया में खतरा और आकर्षण एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। हरे मखमली चादर वाला शख्स अपनी उंगली पर खून की बूंद को ऐसे देख रहा है जैसे कोई कीमती रत्न हो। उसकी आँखों में पागलपन और शक्ति का नशा साफ झलक रहा है। यह दृश्य बताता है कि यहाँ नियम इंसान नहीं, बल्कि ताकतवर बनाते हैं। हर संवाद में एक छिपी हुई धमकी है जो रोंगटे खड़े कर देती है।

सीढ़ियों पर बैठे गवाह

सीढ़ियों पर बैठे ये पात्र सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि इस नाटक के सूत्रधार लगते हैं। एक तरफ कैमोफ्लाज वर्दी में सैनिक जैसा अंदाज, तो दूसरी तरफ सफेद सूट में कोई राजकुमार। इन सबके बीच नीचे खड़ा वो शख्स जो स्पोर्ट्स जर्सी पहने है, मासूमियत और खतरे के बीच की रेखा खींच रहा है। ठुकराई माँ, छुपा आसमान का यह दृश्य दिखाता है कि कैसे अलग-अलग दुनिया के लोग एक छत के नीचे कैसे एक कहानी बुन रहे हैं। हर चेहरे पर एक अलग रहस्य छिपा है।

तानाशाह की दहलीज पर

काले सूट और तितली के आकार के टाई वाला यह शख्स कमरे में घुसते ही माहौल बदल देता है। उसकी मूंछें और गंभीर चेहरा बता रहे हैं कि वह कोई साधारण मेहमान नहीं है। जब वह लाल पोशाक वाली महिला से बात करता है, तो हवा में तनाव साफ महसूस किया जा सकता है। ठुकराई माँ, छुपा आसमान की कहानी में यह पल एक तूफान से पहले की शांति जैसा लगता है। उसकी हर हरकत में एक अजीब सी नर्वसनेस और गुस्सा दिखाई दे रहा है जो आगे कुछ बड़ा होने का संकेत है।

चमड़े का कवच और जख्म

काले चमड़े का टॉप पहने वह युवक, जिसके चेहरे पर खून के निशान हैं, किसी योद्धा से कम नहीं लग रहा। उसकी बांहों पर बनी नसों जैसी नक़्काशी और आँखों में जंगजीवी चमक किसी पुराने युद्ध की याद दिलाती है। वह बांहें बांधकर खड़ा है, जैसे किसी हमले का इंतजार कर रहा हो। ठुकराई माँ, छुपा आसमान के इस हिस्से में हिंसा और सुंदरता का अजीबोगरीब मिश्रण देखने को मिलता है। उसका हर भाव बता रहा है कि वह दर्द से डरता नहीं, बल्कि उसे अपनाता है।

महल का बाहरी नज़ारा

बादलों से ढके आसमान के नीचे खड़ा यह पत्थर का महल किसी डरावनी कहानी का सेट लगता है। पुल पर खड़ा वह शख्स, जिसने कंधे पर काली चादर डाली है, किसी राजा या रक्षक की तरह दिख रहा है। उसकी नज़रें दूर क्षितिज पर टिकी हैं, जैसे वह किसी के आने का इंतजार कर रहा हो। ठुकराई माँ, छुपा आसमान का यह दृश्य कहानी के दायरे को और भी विशाल बना देता है। पुरानी वास्तुकला और धुंधला मौसम मिलकर एक उदास लेकिन भव्य माहौल बना रहे हैं।

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