जिस तरह से वह महिला उस सिंहासन पर बैठी है, उसमें एक अलग ही शक्ति है। उसके सामने खड़े सभी पुरुष डरे हुए लग रहे हैं, जैसे कोई गलती हो गई हो। ठुकराई माँ, छुपा आसमान में ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी आँखों में गुस्सा और निराशा साफ झलक रही है, जबकि सामने वाले माफ़ी मांग रहे हैं। यह सत्ता का खेल बहुत गहरा है।
वह सुनहरे कोट वाला शख्स जो कभी इतना घमंडी लगता था, आज घुटनों पर बैठकर माफ़ी मांग रहा है। उसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर पछतावा साफ दिख रहा है। ठुकराई माँ, छुपा आसमान की कहानी में यह मोड़ बहुत इमोशनल है। बाकी लोग भी पीछे खड़े होकर इस नाटक को देख रहे हैं, लेकिन रानी का फैसला अंतिम लग रहा है।
सफेद शर्ट वाला नौजवान जब तलवार के साथ आगे बढ़ता है, तो माहौल में तनाव बढ़ जाता है। वह रानी का हाथ थामकर उसे सिंहासन से उठाता है, जो दिखाता है कि वह उसका सबसे वफादार साथी है। ठुकराई माँ, छुपा आसमान में वफादारी की यह मिसाल काबिले तारीफ है। बाकी सब डरे हुए हैं, बस यही एक शख्स हिम्मत दिखा रहा है।
बीज रंग के सूट वाले शख्स का रोना दिल को छू लेता है। उसका अहंकार चूर-चूर हो चुका है और वह रानी के चरणों में गिरकर माफ़ी मांग रहा है। ठुकराई माँ, छुपा आसमान में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। उसके दोस्त भी उसे सांत्वना दे रहे हैं, लेकिन रानी का चेहरा पत्थर जैसा सख्त है। क्या वह उसे माफ़ करेगी?
ऊपर बालकनी में खड़े लोग इस पूरे ड्रामे को चुपचाप देख रहे हैं। उनके हाथ में शराब के गिलास हैं और चेहरे पर हैरानी। ठुकराई माँ, छुपा आसमान में यह दिखाया गया है कि कैसे एक गलती पूरे परिवार के माहौल को खराब कर सकती है। नीचे जो हो रहा है, वह उनके लिए भी सबक है। सबकी सांसें थमी हुई हैं।