जब सुरेश ने अपनी ऊर्जा छोड़ी, तो पूरा हॉल कांप उठा। उसकी आंखों में जो आत्मविश्वास था, वह किसी देवता जैसा लग रहा था। दुश्मन घबरा गए, दोस्त हैरान रह गए। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा २ में ऐसे दृश्य देखकर दिल धड़कने लगता है। हर फ्रेम में तनाव और जादू का मिश्रण है।
वह कितनी गर्व से खड़ी थी, फिर एक पल में जमीन पर गिर गई। उसकी आंखों में आश्चर्य और दर्द दोनों थे। सुरेश की शक्ति के आगे उसकी सभी कलाएं बेअसर हो गईं। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा २ में ऐसे मोड़ देखकर रोना आ जाता है। विजयी खड़ा है, पर जीत की कीमत भारी लगती है।
सफेद घूंघट वाली लड़की की आंखें सब कुछ बयां कर रही थीं। वह डरी हुई थी, पर साथ ही सुरेश पर गर्व भी महसूस कर रही थी। उसका हर भाव बदलता रहा जैसे-जैसे युद्ध आगे बढ़ा। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा २ में ऐसे सूक्ष्म अभिनय को सराहना चाहिए। वह बिना बोले सब कह गई।
जैसे ही ऊर्जा की लहरें फैलीं, लोग चीखते हुए भागने लगे। कुर्सियां उल्टीं, मेजें टूटीं, सब कुछ तबाह हो गया। यह दृश्य इतना यथार्थवादी था कि लग रहा था हम भी वहीं हैं। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा २ में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। निर्देशक ने कमाल कर दिया।
जब धूल बैठ गई, तो सुरेश अकेला खड़ा था, शांत और गर्वित। उसकी सफेद पोशाक पर एक भी धब्बा नहीं था। यह दृश्य बताता है कि वह कितना शक्तिशाली है। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा २ में ऐसे नायक को देखकर गर्व होता है। उसकी मुस्कान में विजय का राज छिपा था।