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(डबिंग) दुनिया का सबसे बड़ा आवारा 2वां41एपिसोड

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(डबिंग) दुनिया का सबसे बड़ा आवारा 2

कई सालों तक दबकर रहने के बाद, सुरेश ने अपनी माँ का नाम रोशन किया और फिर अचानक गायब हो गया। एक जवाब की तलाश में वह अकेले दुश्मन देश उत्तर यू पहुँच गया। उसे नहीं पता था कि तीन राजकुमारों को हराने की वजह से वह वहाँ का राष्ट्रीय नायक बन चुका है। लेकिन उत्तर यू के दरबार में उसे दुश्मन की तरह देखा गया। सुरेश को अपनी पहचान छुपाकर हिरण अकादमी में दाखिला लेना पड़ा। पहले ही दिन उसने वहाँ हलचल मचा दी। धीरे-धीरे उसके परिवार का राज और उसकी तलाश का जवाब सामने आने लगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गुनाह का बोझ और माफ़ी

इस दृश्य में भावनाओं का जो तूफ़ान है वो दिल को छू लेता है। लाल पोशाक वाली महिला का पछतावा और सफ़ेद पोशाक वाले युवक की समझदारी देखकर लगता है कि डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा दो में कहानी कितनी गहरी है। जब वो ज़हर का ज़िक्र करती हैं तो सन्नाटा छा जाता है।

ऊर्जा और कला का कमाल

युवक की ऊर्जा को धागों में बदलने की कला सच में अद्भुत है। कठपुतलियों को चलाने का हुनर देखकर हैरानी होती है। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा दो के इस सीन में जादू और यथार्थ का बेहतरीन संगम है। काले वस्त्र वाली योद्धा की चुप्पी भी बहुत कुछ कह जाती है।

पोते का दर्द और दादी का प्यार

जब वो महिला कहती हैं कि अगर ये मेरा पोता होता तो कितना अच्छा होता तो आँखें नम हो जाती हैं। अपने खोए हुए परिवार की याद और पछतावा साफ़ झलकता है। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा दो में रिश्तों की ये गहराई दर्शकों को बांधे रखती है।

माफ़ी का इंतज़ार

महिला का बार बार मैं गुनहगार हूँ कहना और युवक का शांत रहना तनाव बढ़ा देता है। वो जानती हैं कि उन्हें मर जाना चाहिए था फिर भी माफ़ी की उम्मीद है। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा दो के इस मोड़ पर लगता है कि शायद इंसानियत जीत जाए।

अंतिम विदाई और धन्यवाद

जब युवक चले जाते हैं और महिला मुस्कुराते हुए शुक्रिया कहती हैं तो लगता है कि उसे सुकून मिल गया। उसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर संतोष देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। डबिंग दुनिया का सबसे बड़ा आवारा दो का ये अंत बहुत भावुक कर देने वाला है।

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