बारिश की रात में जब अरुण परिवार की हवेली पर हमला हुआ, तो नकाबपोश की क्रूरता देख रोंगटे खड़े हो गए। बच्चे अरुण की आँखों में डर और बदले की आग दोनों साफ दिख रही थीं। चंद्र का धोखा और फिर उसका पापा पर वार, यह सब देखकर दिल दहल गया। योद्धा का बदला की शुरुआत इतनी दर्दनाक होगी, किसी ने सोचा भी नहीं था।
जंगल में भागते हुए पापा ने अरुण को बचाने के लिए जो किया, वह सच्चे पिता का प्यार था। चंद्र के सामने झुकने से इनकार करना और फिर मौत को गले लगाना, यह दृश्य आँखों में आँसू ला देता है। अरुण का रोना और फिर भागना, यह सब योद्धा का बदला की कहानी को एक नया मोड़ देता है।
चंद्र का मुस्कुराता हुआ चेहरा और फिर अरुण के पापा पर किया गया हमला, यह सब देखकर गुस्सा आता है। उसने दोस्ती का नाटक करके जो किया, वह कायरता की हद है। अरुण की आँखों में अब सिर्फ बदला दिखाई दे रहा है। योद्धा का बदला में चंद्र का अंत कैसे होगा, यह देखने के लिए बेताब हूँ।
अरुण की उम्र में इतना दर्द सहना आसान नहीं है। पापा को मरते देखना और फिर चंद्र के सामने बेबस होना, यह सब उसकी आँखों में साफ दिख रहा था। जब वह चट्टान से कूदा, तो लगा जैसे वह डर नहीं, बल्कि बदले की आग लेकर कूद रहा हो। योद्धा का बदला की यह शुरुआत बहुत ही दमदार है।
जब चंद्र और नकाबपोश मशालें लेकर अरुण के पीछे आए, तो माहौल और भी डरावना हो गया। अरुण का भागना और फिर चट्टान से कूदना, यह सब एक सस्पेंस से भरा दृश्य था। योद्धा का बदला में अब अरुण कैसे वापस आएगा और बदला लेगा, यह जानने के लिए उत्सुक हूँ।