शुरुआत में लगता है कि एवा पार्कर बस एक साधारण किरायेदार है, लेकिन जैसे ही एलिस पार्कर की एंट्री होती है, सब कुछ बदल जाता है। एलिस का अहंकार और एवा की मजबूरी देखकर दिल दुखता है। प्यार का किराया सिर्फ एक घर का नहीं, बल्कि इंसानों के रिश्तों का भी सौदा लग रहा है। एवा की आंखों में छिपा दर्द साफ दिख रहा था जब एलिस ने पैसे थमाए।
एलिस पार्कर का किरदार सच में नफरत करने लायक है। उसने एवा को नौकरानी समझकर पैसे थमा दिए, जैसे वो कोई भीख मांग रही हो। ओलिवर का चुप रहना और एवा का मजबूरी में सब सह जाना देखकर गुस्सा आता है। प्यार का किराया में दिखाया गया यह क्लास डिफरेंस बहुत रियल लगता है। पार्टी के सीन में एवा का ट्रे संभालना और एलिस का शराब पीना कंट्रास्ट बहुत तेज था।
ओलिवर पूरे वीडियो में बस तमाशबीन बना रहा। अपनी मंगेतर एलिस के सामने उसने एवा का पक्ष नहीं लिया, भले ही वो सिर्फ किरायेदार ही क्यों न हो। जब एलिस ने पैसे दिए, तो ओलिवर की आंखों में शर्म होनी चाहिए थी। प्यार का किराया की कहानी में यह पात्र सबसे कमजोर कड़ी लगता है। काश वो एवा के लिए आवाज उठाता।
रात की पार्टी का सीन बहुत ही ड्रामेटिक था। एवा जो दिन में घर देख रही थी, रात को वहीं सर्वर बनकर खड़ी थी। एलिस का नशा और एवा की थकान साफ झलक रही थी। जब एवा ने शराब गिरा दी, तो एलिस का रिएक्शन देखकर लगा कि वो एवा को जानबूझकर नीचा दिखा रही है। प्यार का किराया में यह ट्विस्ट बहुत गहरा था।
एवा पार्कर के चेहरे पर जो बेचैनी थी, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उसे पैसे चाहिए थे, शायद किसी मजबूरी की वजह से, इसलिए उसने एलिस का अपमान सहन किया। लेकिन उसकी आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। प्यार का किराया में एवा का किरदार सबसे ज्यादा इमोशनल कनेक्ट देता है। वो हार नहीं मानेगी, यह यकीन है।