इस नाटक का शुरूआती दृश्य ही चौंकाने वाला है जब बिस्तर को सभा के बीच में लाया जाता है। काले सूट वाला व्यक्ति बहुत शांत खड़ा है जबकि सब हैरान हैं। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। छायाकारों की भीड़ और लोगों के चेहरे के भाव बहुत असली लगते हैं। यह बदले की आग को बहुत अच्छे से दिखाता है।
बुजुर्ग के हाथ में तकिया देखकर पहले लगा कि बच्चा है, पर बाद में पता चला यह सब एक नाटक है। इस शो में हर किरदार ने अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई है। सफेद सूट वाले व्यक्ति की घबराहट साफ दिख रही थी। जब उसने काले सूट वाले को देखा तो उसकी आंखों में गुस्सा था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू देखने के बाद मन बहुत संतुष्ट हुआ।
कंपनी के लिस्टिंग समारोह में ऐसा हंगामा होना बहुत बड़ी बात है। काले सूट वाले नायक की मुस्कान में एक अलग ही खतरनाकपन था। उसने बिना कुछ कहे सबको सबक सिखा दिया। काली साड़ी वाली की हालत देखकर तरस आया। यह श्रृंखला हर कड़ी में नया खुलासा करती है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की यह कहानी दिलचस्प है।
जब तस्वीर लेने वाले यंत्र क्लिक करने लगे तो सबकी सांसें रुक गईं। यह बदले का सबसे बेहतरीन पल था जब सब कुछ खुलकर सामने आ गया। सफेद जैकेट वाले व्यक्ति को अपनी गलती का अहसास हो रहा था। भीड़ में खड़े लोगों की फुसफुसाहट माहौल को और तनावपूर्ण बना रही थी। इस ड्रामे की पटकथा बहुत मजबूत है और दर्शकों को बांधे रखती है।
दो व्यक्तियों के बीच की ठंडी जंग को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। एक शांत खड़ा है और दूसरा गुस्से में कांप रहा है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे संवाद हैं जो सीधे दिल पर लगते हैं। लाल दरी और सजावट के बीच यह बदले का मंजर बहुत यादगार बन गया है। हर कोई इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहा है।
सभा के बीच में बिस्तर देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। यह योजना बहुत गहरी थी और पहले से सोची समझी लग रही थी। काले सूट वाले व्यक्ति ने अपनी चालाकी से सबको हरा दिया। बुजुर्ग जोड़े की प्रतिक्रिया भी बहुत मायने रखती है इस कहानी में। यह शो परिवार के विश्वासघात पर एक कड़ा प्रहार करता है।
इस कहानी में हर मोड़ पर नया सस्पेंस है जो दर्शकों को बांधे रखता है। जब सफेद सूट वाले ने कपड़े पहने तो उसकी शर्मिंदगी साफ झलक रही थी। काले सूट वाले की जीत निश्चित थी क्योंकि उसने सबूत पहले ही इकट्ठे कर लिए थे। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की रफ्तार बहुत तेज है और बिल्कुल भी नीरस नहीं है।
काली पोशाक वाली के चेहरे पर डर और हैरानी देखकर लग रहा था कि वह सब कुछ भूल गई है। इस नाटक में भावनाओं को बहुत गहराई से दिखाया गया है। सभा कक्ष का माहौल और वहां की रोशनी भी कहानी का हिस्सा बन गई है। यह बदले की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे परिवार की है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू जरूर देखें।
जब नायक ने उंगली उठाकर इशारा किया तो सब समझ गए कि अब क्या होने वाला है। यह पल इस श्रृंखला का सबसे खास पल है। सफेद जैकेट वाले व्यक्ति को अब कोई नहीं बचा सकता था। भीड़ में खड़ी नीली कोट वाली भी सब गौर से देख रही थी। इस ड्रामे का निर्देशन और कलाकारों का अभिनय बहुत लाजवाब है।
अंत में जब सब कुछ शांत हुआ तो नायक की मुस्कान सब कुछ कह गई। यह बदला बहुत ही सटीक और समय पर दिया गया। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी हमें सिखाती है कि सच कभी छुपा नहीं रह सकता। हर दृश्य में नई ऊर्जा है जो दर्शकों को पसंद आएगी। यह शो बड़े पर्दे जैसी गुणवत्ता का अनुभव देता है।