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प्रसव कक्ष से बदला शुरूवां57एपिसोड

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प्रसव कक्ष से बदला शुरू

पति ने प्यार में पत्नी की कंपनी चलाने के लिए अपनी पहचान छुपाई। जब पत्नी के जन्म के समय वह बाहर था, तो उसके 'पुरुष मित्र' ने बच्चे की नाल काटी और पत्नी ने नवजात बेटे को उसी मित्र को 'पिता' कहना सिखाया। फिर पति की जगह और सारे अधिकार भी उस मित्र को देने की कोशिश की गई। अब पति ने बदला लेने की साजिश रची है…
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इस एपिसोड की समीक्षा

ठंडे इरादे

इस दृश्य में जो तनाव है वो देखने लायक है। सूट पहने व्यक्ति की ठंडक और काली कोट वाली की घबराहट साफ दिखती है। बीच में बंधी हुई की आँखों में डर साफ है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू का ये सीन दिल को छू लेता है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखते वक्त लगा कि कहानी में गहराई है। सभी किरदार अपनी जगह सही लग रहे हैं और माहौल बहुत भारी है।

धोखे की रात

कहानी का मोड़ यहाँ से शुरू होता है जब वो एक दूसरे को घूरते हैं। पीछे बंधी हुई की मजबूरी साफ झलकती है। आगे खड़े दो लोगों के बीच की कशमकश ने मुझे बांध कर रखा। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे पल बहुत आते हैं जो दिमाग में बस जाते हैं। रोशनी का इस्तेमाल भी कमाल का था और हर चेहरे पर अलग कहानी लिखी थी।

अंधेरा सच

कमरे की सुनसान और ठंडी हवा ने इस सीन को और भी डरावना बना दिया। चश्मे वाले व्यक्ति का चेहरा बिल्कुल पत्थर जैसा था। उसने जब उसकी तरफ देखा तो लगा कुछ बड़ा होने वाला है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की ये कहानी हर मोड़ पर हैरान करती है। मैंने इसे नेटशॉर्ट ऐप पर देखा और मुझे लगा ये अब तक का सबसे रोमांचक किस्से में से एक है।

बदले की आग

जब उसने उसका हाथ पकड़ा तो लगा शायद सब ठीक हो जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं। बंधी हुई की सांसें तेज हो गई थीं। हर कदम पर शक और भरोसे का खेल चल रहा था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ये पल सबसे ज्यादा भारी था। एक्टिंग इतनी असली थी कि लगा मैं वहीं खड़ा हूं। माहौल में जो गंभीरता थी वो लाजवाब थी।

खामोश चेहरे

बिना कुछ बोले ही सब कुछ कह दिया गया है इस सीन में। आँखों के इशारे ने पूरी कहानी बता दी। सूट वाले का गुस्सा और दूसरी की माफी मांगती नजर दिल को छू गई। प्रसव कक्ष से बदला शुरू का ये हिस्सा बहुत ही इमोशनल था। नेटशॉर्ट ऐप की क्वालिटी भी अच्छी थी जिसने हर एक्सप्रेशन को साफ दिखाया। ये दृश्य भूलना मुश्किल है।

रिश्तों का बोझ

इन तीनों के बीच का रिश्ता कितना उलझा हुआ है ये देख कर ही पता चल गया। एक तरफ मजबूरी थी तो दूसरी तरफ ताकत का घमंड। बीच में फंसा व्यक्ति बस देखता रहा। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की स्क्रिप्ट में ये ट्विस्ट बहुत अच्छा लगा। हर कैरेक्टर की अपनी मजबूरी थी जो स्क्रीन पर साफ दिखाई दी। देखने वाले को ये पसंद आएगा।

सन्नाटे की चीख

कमरे में सन्नाटा था पर शोर सब कुछ कह रहा था। जब उसने मुंह मोड़ा तो लगा सब खत्म हो गया। बंधी हुई की हालत देख कर बुरा लगा। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे दृश्य बहुत कम मिलते हैं। लाइटिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक ने माहौल को और गहरा कर दिया। ये एक परफेक्ट थ्रिलर सीन था जो एंड तक बांध कर रखता है।

आखिरी मौका

लगता था कि शायद वो उसे छोड़ देगा पर उसने ऐसा नहीं किया। ठंडे दिमाग वाले व्यक्ति ने अपनी बात मनवानी ही थी। काली कोट वाली की रिक्वेस्ट भी काम नहीं आई। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की ये कहानी बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ये सीरीज देखना एक अलग ही अनुभव था। हर फ्रेम में कुछ ना कुछ छुपा था।

टूटा भरोसा

जब भरोसा टूटता है तो माहौल कैसा होता है ये सीन दिखाता है। सभी के चेहरे पर मायूसी थी। कोई खुश नहीं था बस एक अधूरा पन था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू ने ये सबूत दिया कि ड्रामा कितना पावरफुल हो सकता है। एक्टिंग में दम था और डायरेक्शन भी जबरदस्त थी। ये सीन बार बार देखने को मन करता है।

रात का सच

अंधेरे कमरे में जो सच उजागर हुआ वो हैरान करने वाला था। सूट वाले ने अपनी जीत दिखा दी थी। बंधी हुई की किस्मत अब भी जारी थी। प्रसव कक्ष से बदला शुरू का ये अंत नहीं बस शुरुआत थी। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसी कंटेंट मिलना आज कल मुश्किल है। मुझे ये स्टाइल बहुत पसंद आया और मैं और देखना चाहता हूं।