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प्रसव कक्ष से बदला शुरूवां56एपिसोड

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प्रसव कक्ष से बदला शुरू

पति ने प्यार में पत्नी की कंपनी चलाने के लिए अपनी पहचान छुपाई। जब पत्नी के जन्म के समय वह बाहर था, तो उसके 'पुरुष मित्र' ने बच्चे की नाल काटी और पत्नी ने नवजात बेटे को उसी मित्र को 'पिता' कहना सिखाया। फिर पति की जगह और सारे अधिकार भी उस मित्र को देने की कोशिश की गई। अब पति ने बदला लेने की साजिश रची है…
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इस एपिसोड की समीक्षा

खतरे में जान

इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस रुक जाती है। चाकू की नोक पर जब बातचीत हो रही थी, तो लगा कि अब कुछ भी हो सकता है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में यह मोड़ बहुत ही चौंकाने वाला था। सूट वाला व्यक्ति समय पर पहुंचा नहीं तो बड़ी दुर्घटना हो जाती। अंधेरे कमरे की रोशनी ने डर को और बढ़ा दिया है। देखने वाले का दिल जोर से धड़कने लगता है इस सीन को देखकर। बहुत ही खतरनाक स्थिति थी।

बदले की आग

काले सूट वाली पात्र की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। उसने चाकू उठाया तो लगा अब तो खत्म हो गया। लेकिन कहानी में ऐसे मोड़ ही तो मजा देते हैं। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में हर किरदार अपना काम निभा रहा है। बंधी हुई नायिका की आंखों में डर और उम्मीद दोनों थे। यह दृश्य बहुत ही रोमांचक था। हर पल लग रहा था कि अब कुछ बड़ा होने वाला है जरूर। सब हैरान थे।

समय पर आगमन

जब चाकू ऊपर उठा तो लगा अब चोट लगने वाली है। तभी वह रक्षक आया और सब कुछ बदल गया। उसका आगमन बहुत ही नाटकीय था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू के इस भाग में रोमांच और नाटक दोनों है। रस्सी से बंधी नायिका को देखकर दिल दहल गया। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। बचाव करने वाले की हिम्मत की दाद देनी चाहिए। सही समय पर वह वहां पहुंच गया था। जान बच गई।

अंधेरे का साया

रात का वक्त और सुनसान जगह, माहौल पहले से ही डरावना था। जब चाकू दिखा तो डर और बढ़ गया। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में यह सबसे खतरनाक पल था। दोनों पात्रों के बीच की दुश्मनी साफ झलक रही थी। सूट वाले शख्स ने आकर जान बचाई। रोशनी का इस्तेमाल बहुत ही अच्छा था। देखने वाले को डर लग रहा था। सब कुछ सही तरीके से हुआ।

गुस्से का पैमाना

हमलावर पात्र का गुस्सा देखकर लगा कि वह किसी बात से बहुत नाराज है। उसने चाकू से धमकी दी तो माहौल गंभीर हो गया। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे दृश्य कहानी को आगे बढ़ाते हैं। बंधी हुई नायिका चुपचाप सब सह रही थी। अंत में राहत मिली जब वह रक्षक आ गया। बहुत ही रोमांचक था। हर किसी को यह पसंद आएगा। दिल पर असर हुआ।

मौत का खेल

चाकू की धार और गुस्से भरी आंखें, यह मिलन बहुत खतरनाक था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में जान का खतरा हर पल बना हुआ था। कार का दृश्य और फिर वह कमरा, सब कुछ रहस्य से भरा था। सूट वाले व्यक्ति के प्रवेश ने जान बचाई। ऐसे रोमांचक दृश्य बहुत पसंद आते हैं। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। बचाव करने वाला हीरो लग रहा था। सब देख रहे थे।

रस्सी और डर

कुर्सी से बंधी नायिका की हालत देखकर तरस आ रहा था। सामने खड़ी पात्र उसे डरा रही थी। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की पटकथा में यह बहुत अहम हिस्सा है। जब चाकू चला तो लगा अब तो हो गया। लेकिन समय पर मदद आ गई। अभिनय बहुत ही स्वाभाविक लग रहा था। दर्शक इससे जुड़ जाते हैं। बहुत ही अच्छा लगा। सबको पसंद आया।

रात की वारदात

कार की रोशनी और फिर वह अंधेरा कमरा, दृश्य बहुत ही फिल्मी था। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। हमलावर पात्र का इरादा साफ था कि वह चोट पहुंचाना चाहती है। सूट वाले शख्स ने बीच में आकर सब रोका। बहुत ही रहस्यमय पल था। रात का माहौल डरावना था। सब कुछ सही लगा। देखने में मजा आया।

दुश्मनी की हद

जब कोई चाकू लेकर सामने खड़ा हो तो दुश्मनी की हद पता चलती है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में यह दृश्य सबसे कठिन था। बंधी हुई लड़की की आंखों में सवाल थे। काले सूट वाली पात्र का गुस्सा जायज लग रहा था या नहीं, यह तो पता नहीं। पर दृश्य जबरदस्त था। हर कोई हैरान रह गया। देखने में बहुत अच्छा लगा। सबको पसंद आया।

बचाव की उम्मीद

जब सब उम्मीदें टूट रही थीं, तभी वह व्यक्ति आया। उसने चाकू पकड़ने वाले हाथ को रोका। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में यह बदलाव का पल था। रस्सी से बंधी नायिका को राहत मिली। अंधेरे में रोशनी की किरण जैसा लगा। ऐसे दृश्य दिल पर असर करते हैं। बहुत ही भावुक कर देने वाला था। सब खुश हो गए। जान बच गई।