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प्रसव कक्ष से बदला शुरूवां58एपिसोड

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प्रसव कक्ष से बदला शुरू

पति ने प्यार में पत्नी की कंपनी चलाने के लिए अपनी पहचान छुपाई। जब पत्नी के जन्म के समय वह बाहर था, तो उसके 'पुरुष मित्र' ने बच्चे की नाल काटी और पत्नी ने नवजात बेटे को उसी मित्र को 'पिता' कहना सिखाया। फिर पति की जगह और सारे अधिकार भी उस मित्र को देने की कोशिश की गई। अब पति ने बदला लेने की साजिश रची है…
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इस एपिसोड की समीक्षा

दर्दनाक चीखें और खामोशी

इस दृश्य में दर्द साफ झलक रहा है। काले ब्लेजर वाली पात्र की आंखों में आंसू देखकर दिल भर आता है। वह व्यक्ति बिना किसी भाव के खड़ा है, जैसे उसे कोई फर्क ही न पड़ता हो। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में यह मोड़ बहुत हैरान करने वाला है। कुर्सी पर बंधी हुई पात्र की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी लग रही है। माहौल इतना तनावपूर्ण है कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। अभिनय बहुत ही दमदार है और दर्शकों को बांधे रखता है।

पत्थर दिल का सामना

सूट पहने व्यक्ति की ठंडक देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वह सामने खड़ी पात्र की भीख को नजरअंदाज कर रहा है। यह दृश्य बताता है कि बदले की आग कितनी खतरनाक हो सकती है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे दृश्य देखकर मुख्य पात्र की मजबूरी समझ आती है। रोशनी का इस्तेमाल बहुत गहरा है, जो अंधेरे सच को उजागर करता है। हर कोई किरदार अपने आप में एक पहेली है जो सुलझनी बाकी है।

खामोशी का शोर

कुर्सी से बंधी पात्र की आंखों में एक अलग ही चमक है। वह कुछ बोल नहीं रही पर उसकी खामोशी शोर मचा रही है। सामने खड़ी पात्र गिर जाती है, यह देखकर बहुत बुरा लगा। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में हर पल नया रहस्य बना रहता है। यह दृश्य दिखाता है कि रिश्तों में धोखा कितना गहरा घाव दे सकता है। कैमरे की पकड़ भी बहुत सटीक है जो हर भाव को कैद करता है।

कहानी का नया मोड़

इस शो का हर एपिसोड एक नया झटका देता है। यहां तीन पात्रों के बीच की खींचतान देखने लायक है। सूट वाला व्यक्ति शायद खलनायक है या फिर किसी मजबूरी में है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे मोड़ ही जान डालते हैं। काले ब्लेजर वाली पात्र की चीखें बिना आवाज के भी सुनाई दे रही हैं। निर्देशन बहुत ही शानदार है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

भावनाओं का खेल

भावनाओं का यह खेल कब तक चलेगा यह तो पता नहीं। पर इस वक्त जो हो रहा है वह दिल दहला देने वाला है। एक तरफ रोना है तो दूसरी तरफ पत्थर दिल खड़ा है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की रफ्तार बहुत तेज है। कुर्सी पर बंधी पात्र की किस्मत का फैसला अब होने वाला है। यह दृश्य देखकर लगता है कि आगे और भी बड़ा धमाका होने वाला है।

अंधेरे कमरे का नाटक

अंधेरे कमरे में यह नाटक अपने चरम पर है। सूट पहने व्यक्ति के चश्मे के पीछे की आंखें कुछ छिपा रही हैं। सामने खड़ी पात्र टूट चुकी है और अब जमीन पर गिर गई है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे भावनात्मक दृश्य बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह कहानी सिर्फ बदले की नहीं बल्कि टूटे हुए भरोसे की भी है। हर छवि एक तस्वीर की तरह है।

सत्ता का समीकरण

यह दृश्य बताता है कि सत्ता किसके हाथ में है। सूट वाला व्यक्ति सब कुछ नियंत्रण कर रहा है जबकि बाकी दो पात्र बेबस हैं। प्रसव कक्ष से बदला शुरू की कहानी में सत्ता के समीकरण बहुत दिलचस्प हैं। काले ब्लेजर वाली पात्र की विनती व्यर्थ जाती दिख रही है। यह वक्त का सबसे कठिन पल है जो पर्दे पर कैद हुआ है। अभिनेताओं ने जान डाल दी है।

टूटी हुई उम्मीदें

जमीन पर गिरने का वह पल बहुत ही दर्दनाक था। ऐसा लगा जैसे उसकी उम्मीदें भी साथ ही टूट गई हों। सूट पहने व्यक्ति ने एक बार भी पलक नहीं झपकाई। प्रसव कक्ष से बदला शुरू में ऐसे दृश्य दर्शकों को झकझोर देते हैं। कुर्सी पर बंधी पात्र अब भी चुप है जो सबसे बड़ा सवाल है। माहौल में जो खामोशी है वह शोर से ज्यादा तेज है।

गहरी कहानी की परतें

इस शो की कहानी में गहराई बहुत है। हर किरदार के पीछे एक वजह है जो धीरे धीरे सामने आ रही है। सूट वाला व्यक्ति शायद अतीत के किसी राज को जानता है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू देखते वक्त समय का पता ही नहीं चलता। काले ब्लेजर वाली पात्र की हालत देखकर सहानुभूति होती है। यह रोमांच और नाटक का उत्कृष्ट मिश्रण है।

बदले की शुरुआत

अंत में जो सन्नाटा छा गया वह सबसे भारी था। सब कुछ रुक सा गया है पर कहानी आगे बढ़ रही है। सूट पहने व्यक्ति की मुस्कान में छिपा खतरा साफ दिख रहा है। प्रसव कक्ष से बदला शुरू का यह दृश्य लंबे समय तक याद रहेगा। कुर्सी पर बंधी पात्र की आंखों में अब आंसू नहीं गुस्सा है। यह बदले की आग की शुरुआत भर है।