PreviousLater
Close

रूप का धोखावां18एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

रूप का धोखा

तारा शेट्टी ने अर्जुन राठौर से बीस साल प्यार किया। एक भयानक आग में उसकी जान बचाने के लिए तारा ने अपनी पूरी त्वचा दान कर दी, जिससे उसका चेहरा बिगड़ गया और उसे कैंसर की आख़िरी स्टेज हो गई। अर्जुन होश में आया तो तनु शेट्टी के झूठ में फँसकर तारा को ही ठुकराने लगा। आख़िरी दिनों में तारा ने दर्द सहकर त्वचा प्रत्यारोपण से नया चेहरा बनाया और तीन छोटी‑सी ख्वाहिशें मांगी। लेकिन तनु की चालें बढ़ती गईं और एक दिन सबके सामने तारा का नया चेहरा पिघल गया, और सच सामने आते ही अर्जुन की दुनिया बिखर गई।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

सूट बनाम पायजामा: दो चेहरे एक इंसान के

वीडियो में कंट्रास्ट बहुत जबरदस्त है। एक तरफ फॉर्मल सूट में बिज़नेस मीटिंग जैसा माहौल, तो दूसरी तरफ रात के वक्त पायजामे में बेचैनी। यही तो असली ज़िंदगी है जहाँ हम दिन भर मुखौटा पहनते हैं और रात को खुद से मिलते हैं। फोन स्क्रीन पर वो मैसेज देखकर हैरानी हुई, शायद यही वजह है उसकी परेशानी की। रूप का धोखा कहानी का सबसे गहरा पहलू बन गया है।

बिस्तर पर अकेलापन और फोन की रोशनी

सबसे दर्दनाक सीन वो है जब वो बिस्तर पर लेटा है और बगल में सो रही महिला को देख रहा है, पर उसका ध्यान फोन पर है। ये दूरी सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक भी है। नीली रोशनी में उसका चेहरा कितना उदास लग रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि कहानीकार ने हर बारीकी को पकड़ा है। रूप का धोखा शायद इसी दोहरेपन का नाम है जो वो झेल रहा है।

बैंगनी पोशाक और सफेद कोट का टकराव

दो अलग-अलग महिलाएं, दो अलग-अलग वाइब्स। एक की बैंगनी पोशाक में नज़ाकत है तो दूसरी के सफेद कोट में ठंडक। पुरुष का रिएक्शन दोनों के प्रति अलग-अलग है, जो कन्फ्यूजन को साफ दिखाता है। मोमबत्ती बुझाना और फिर से जलाना जैसे उनके रिश्तों का प्रतीक लगता है। रूप का धोखा की कहानी में ये किरदार बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। विजुअल्स बहुत ही सिनेमैटिक हैं।

सोशल मीडिया की दुनिया और असली दर्द

जब वो फोन स्क्रॉल कर रहा था और खबरें पढ़ रहा था, तो लगा कि बाहर की दुनिया कितनी तेज़ी से बदल रही है जबकि वो अंदर से स्थिर हो गया है। खबरों में जो 'इलाज मिल गया' वाला टेक्स्ट था, शायद वो किसी और की खुशी है, उसकी नहीं। ये आयरनी बहुत गहरी है। नेटशॉर्ट पर ऐसे लेयर्ड कंटेंट मिलना दुर्लभ है। रूप का धोखा सिर्फ स्क्रीन पर नहीं, हकीकत में भी दिखता है।

छूने का डर और दूरियां

महिला का हाथ उसके कंधे पर रखना और उसका हिलना नहीं, ये छोटा सा एक्शन बहुत कुछ कह जाता है। वो छूना चाहती है पर शायद डरती है, या शायद वो अब उस स्पर्श के काबिल नहीं रहा। बॉडी लैंग्वेज में जो टेंशन है वो डायलॉग से ज़्यादा असरदार है। रूप का धोखा की ये बारीकियां दर्शक को बांधे रखती हैं। नेटशॉर्ट की क्वालिटी देखकर दाद देनी पड़ती है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down