वह स्ट्रेचर पर लेटी थी, पर आँखें खुली थीं — जैसे कुछ कहना चाहती हो। रूप का धोखा अब खत्म हो रहा था, पर कहानी नहीं। शायद अगली बार वह जीत जाएगी… या शायद नहीं।
वह खड़ा था जैसे राजा, पर दिल में बर्फ जमी थी। उसने देखा, पर मदद नहीं की। रूप का धोखा उसे भी छू गया — बाहर से शानदार, अंदर से खोखला। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, खामोशी थी… जो चीख रही थी।
उसकी मुस्कान में जहर था, आँखों में जीत। वह जानती थी कि वह हार चुकी है, पर फिर भी मुस्कुराई। रूप का धोखा उसके लिए खेल था — वह खेल रही थी, जबकि दूसरी रो रही थी। कितनी ठंडी है यह दुनिया!
जब कागज फटे, तो लगा जैसे वादे भी फट गए हों। वह जमीन पर पड़ी थी, पर उसका दर्द आसमान छू रहा था। रूप का धोखा सिर्फ चेहरे पर नहीं, रिश्तों में भी था। कौन सच्चा? कौन झूठा? सब धुंधला है।
जब एम्बुलेंस आई, तो लगा जैसे समय रुक गया हो। वह स्ट्रेचर पर लेटी थी, पर उसकी आँखें अभी भी उसकी तरफ देख रही थीं। रूप का धोखा अब खत्म हो रहा था — शायद मौत ही आखिरी सच्चाई है।