उसने जब तारा शेट्टी का गला पकड़ा तो लगा कि अब सब खत्म हो जाएगा, लेकिन उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी। रूप का धोखा इतना बड़ा था कि वो खुद को संभाल नहीं पा रहा था। हर पल उसे लग रहा था कि वो किसी सपने में फंस गया है।
जब वो अस्पताल के गलियारे में दौड़ा, तो लगा कि वो किसी रेस में है। नर्सिंग स्टेशन पर पहुँचकर उसने कंप्यूटर स्क्रीन देखी, लेकिन वहाँ भी कोई जवाब नहीं मिला। रूप का धोखा इतना गहरा था कि उसे लग रहा था कि वो अकेला पड़ गया है।
डॉक्टर ने जब उसे मौत की रिपोर्ट दी, तो उसकी साँसें रुक गईं। तारा शेट्टी की मौत का सच अब उसके सामने था, लेकिन वो इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा था। रूप का धोखा इतना बड़ा था कि उसे लग रहा था कि वो पागल हो जाएगा।
उसकी आँखों में जो डर था, वो सिर्फ गुस्से का नहीं था। तारा शेट्टी की मौत के बाद उसे लगा कि वो खुद को खो चुका है। रूप का धोखा इतना गहरा था कि उसे लग रहा था कि वो किसी अंधेरे कुएं में गिर गया है।
मौत की रिपोर्ट हाथ में लेते ही उसे लगा कि वो कागज़ नहीं, बल्कि पहाड़ पकड़ लिया है। तारा शेट्टी की मौत का सच अब उसके कंधों पर था। रूप का धोखा इतना बड़ा था कि वो इसे झेल नहीं पा रहा था।