वह कागज़ रखकर धीरे से पीछे हटता है, जैसे किसी अंतिम संस्कार में शब्द बेमानी हो जाएँ। दीवार पर लगी तस्वीर में मुस्कान है, पर कमरे में सन्नाटा चीख रहा है। रूप का धोखा की यह चुप्पी दिल को छू लेती है। हर कदम भारी लगता है, जैसे वह अपने ही अतीत से भाग रहा हो।
लाल फ्रेम में उसकी तस्वीर टंगी है, जैसे कोई पुरानी कहानी अभी भी जीवित हो। वह व्यक्ति बिना कुछ कहे बस देखता रहता है, मानो शब्दों में बाँट पाना नामुमकिन हो। रूप का धोखा के इस पल में हर चीज़ अर्थपूर्ण लगती है – मोमबत्ती, धूप, फूल… सब कुछ एक अधूरी विदाई कह रहा है।
उसने कागज़ मेज़ पर रखा, शायद कोई पत्र या वसीयत। उसके हाथ काँप रहे थे, पर चेहरे पर दृढ़ता थी। रूप का धोखा के इस दृश्य में सम्मान और दर्द का अनोखा मिश्रण है। वह मुड़ा और चला गया, जैसे जानता हो कि अब लौटना नहीं है। पीछे बस तस्वीर और मोमबत्तियाँ जलती रहीं।
काले कपड़े, काले विचार, काला सन्नाटा। वह व्यक्ति जैसे अपने भीतर के तूफान को संभालने की कोशिश कर रहा हो। रूप का धोखा के इस दृश्य में हर चीज़ गहरी है – नज़रें, कदम, साँसें। तस्वीर की ओर देखते हुए उसकी आँखों में एक सवाल था: 'क्यों?' पर जवाब कहीं खो गया।
वह धीरे धीरे पीछे हटा, जैसे किसी पवित्र स्थल से विदा ले रहा हो। कमरे में फूलों की खुशबू थी, पर दिल में कड़वाहट। रूप का धोखा के इस दृश्य में विदाई का दर्द इतना साफ़ है कि आँखें नम हो जाती हैं। वह मुड़ा और चला गया, जैसे जानता हो कि अब कुछ नहीं बचा।