जब चंदन सिंह ने अपनी मासूम सी मुस्कान के साथ प्रवेश किया, तो लगता है जैसे पूरा वातावरण हल्का हो गया। अमर का चेहरा देखकर साफ पता चल रहा था कि वो इस अप्रत्याशित मुलाकात से हैरान हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रेम में ऐसे मोड़ आते रहते हैं जो दिल को छू जाते हैं। चंदन की आँखों में छिपी शरारत और अमर की गंभीरता का विपर्यास देखने लायक था।
सफेद कोट पहने वो लड़की जब अमर के पास आई, तो उसकी आवाज़ में एक अजीब सी नरमी थी। अमर की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि वो उसे पहले से जानते हैं या फिर कुछ खास रिश्ता है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रेम के इस दृश्य में तनाव और देखभाल का मिश्रण बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। उसकी आँखों में चिंता साफ झलक रही थी।
उस लड़की का चेहरा देखकर साफ पता चल रहा था कि वो कुछ नाराज या परेशान है। जब उसने अपना थैला उठाया और जाने लगी, तो लगता है जैसे कोई बड़ा झगड़ा होने वाला हो। अमर और चंदन दोनों ही उसकी तरफ देख रहे थे, जैसे कुछ कहना चाहते हों। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रेम में ऐसे भावनात्मक क्षण ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं।
अमर पूरे दृश्य में बहुत कम बोलते हैं, लेकिन उनकी आँखें सब कुछ कह जाती हैं। जब चंदन कुछ कह रहा था, तो अमर का चेहरा पत्थर जैसा था, मानो वो अपने अंदर किसी बड़े संघर्ष से जूझ रहे हों। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रेम में पात्रों की खामोशी भी संवाद से ज्यादा असरदार होती है। उनकी हर भाव-भंगिमा में एक कहानी छिपी है।
चंदन को अमर का छोटा भाई बताकर जब वो सामने आया, तो लगता है जैसे पुराने राज खुलने वाले हों। दोनों के बीच की मेलजोल बहुत स्वाभाविक है - एक गंभीर, दूसरा मस्तमौला। मुख्य कार्यकारी अधिकारी के प्रेम में परिवार की गतिशीलता को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। चंदन की बातों में एक अलग ही अपील है जो अमर को भी पिघला देती है।