इस दृश्य में माँ की आँखों में दर्द और बेटे की बेरुखी देखकर दिल दहल गया। सीईओ का प्यार शायद यहीं खत्म हो गया जब उसने अपनी माँ को रोते हुए देखा भी तो मुस्कुराया नहीं। घर का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि साँस लेना मुश्किल हो रहा था।
बेटा इतना ठंडा कैसे हो सकता है? माँ रो रही है, हाथ जोड़ रही है, फिर भी वह बिना किसी भावना के खड़ा है। सीईओ का प्यार शायद पैसों में दब गया। इस दृश्य ने मुझे रुला दिया, क्योंकि असल जिंदगी में भी ऐसे बेटे होते हैं।
कमरे की सजावट शाही थी, लेकिन भावनाओं का माहौल इतना भारी था कि लग रहा था दीवारें भी रो रही हों। माँ की आवाज़ काँप रही थी, और बेटे की आँखों में कोई पछतावा नहीं। सीईओ का प्यार यहाँ बिल्कुल गायब था।
माँ बार-बार बेटे की आँखों में देख रही थी, जैसे पूछ रही हो—'क्या मैंने कुछ गलत किया?' लेकिन बेटा मुँह मोड़ लेता है। सीईओ का प्यार शायद कभी था ही नहीं, बस दिखावा था। इस दृश्य ने दिल तोड़ दिया।
जब बेटा मुस्कुराता है, तो लगता है जैसे वह माँ के दर्द का मज़ाक उड़ा रहा हो। उसकी मुस्कान में कोई गर्माहट नहीं, बस एक ठंडापन है। सीईओ का प्यार यहाँ बिल्कुल फीका पड़ गया। ऐसे बेटे से दूर रहना ही बेहतर है।