शुरुआत में ही हीरो का पानी पर चलने का दावा देखकर लगा कि अब कोई कमाल होने वाला है, लेकिन निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में जैसे ही वह लोटस के पत्तों पर कदम रखता है, सब कुछ उल्टा हो जाता है। उसका संतुलन बिगड़ना और धड़ाम से पानी में गिरना देखकर हंसी नहीं रुक रही थी। यह सीन दिखाता है कि दिखावे और हकीकत में कितना फर्क होता है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी उसी पल बदल जाती हैं, जो इस शो की सबसे बड़ी खासियत है।
जब हीरो पानी में गिरता है, तो किनारे खड़ी भीड़ की प्रतिक्रिया देखने लायक होती है। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में कुछ लोग हैरान होते हैं, तो कुछ खुलकर हंसते हैं। यह सीन समाज के उस चेहरे को दिखाता है जो किसी की नाकामी पर तालियां बजाने से नहीं चूकता। हीरो की शर्मिंदगी और भीड़ की हंसी के बीच का तनाव बहुत बारीकी से दिखाया गया है। यह सिर्फ एक एक्शन सीन नहीं, बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी भी लगती है।
हीरो के पानी से बाहर निकलते ही विलेन की एंट्री होती है, जो निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में कहानी का मोड़ बदल देती है। विलेन का हीरो के कंधे पर हाथ रखना और फिर उसका मजाक उड़ाना, यह सब हीरो की बेबसी को और बढ़ा देता है। हीरो का चेहरा देखकर लगता है कि वह अंदर से टूट गया है, लेकिन बाहर से शांत बना हुआ है। यह मुकाबला सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि मनोबल का भी है।
निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में किरदारों के कपड़ों के रंग उनकी पहचान बन गए हैं। हीरो का सादा नीला परिधान उसकी सादगी दिखाता है, जबकि विलेन का कढ़ाई वाला गहरा लिबास उसकी अमीरी और घमंड को दर्शाता है। यह विजुअल कंट्रास्ट कहानी को बिना डायलॉग के समझा देता है। हीरो के गीले कपड़े और विलेन के सूखे और साफ कपड़े उनके बीच के फर्क को और भी साफ कर देते हैं।
विलेन का किरदार निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में बहुत ही चालाक और अहंकारी दिखाया गया है। वह हीरो की नाकामी का फायदा उठाकर उसे नीचा दिखाने की कोशिश करता है। उसकी मुस्कान में एक छिपी हुई चालाकी है, जो हीरो के लिए मुसीबत बन सकती है। यह किरदार दर्शकों को नफरत भी कराता है और डराता भी है। उसकी हरकतें बताती हैं कि वह आगे चलकर कहानी में बड़ी भूमिका निभाने वाला है।