खाने की मेज पर सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन हवा में कुछ अजीब सी बेचैनी थी। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में यह दृश्य दिखाता है कि कैसे एक छोटी सी मुस्कान के पीछे बड़े षड्यंत्र छिपे होते हैं। बूढ़े दादाजी की हंसी और नौजवानों की चुप्पी के बीच का तनाव कमाल का था। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा धमाका होने वाला हो, और फिर अचानक वह युवती तलवार लेकर आ गई। यह मोड़ देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
जब वह लड़की तलवार कंधे पर रखकर चलती हुई आई, तो पूरा माहौल बदल गया। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट के इस सीन में उसकी आंखों में जो ठंडक थी, वह किसी भी डायलॉग से ज्यादा असरदार थी। सफेद कपड़ों वाला लड़का और बाकी परिवार वाले सब हैरान रह गए। यह दृश्य साबित करता है कि कभी-कभी खामोशी सबसे बड़ा शोर होती है। उसकी ड्रेसिंग और चलने का अंदाज किसी योद्धा से कम नहीं लग रहा था।
शराब के प्याले उठाने का वह दृश्य बहुत गहरा था। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में दिखाया गया है कि कैसे एक ही मेज पर बैठकर भी लोग एक-दूसरे से कितने दूर हो सकते हैं। जब सबने एक साथ पीने की कोशिश की, तो लगा जैसे कोई पुरानी कसम खाई जा रही हो। लेकिन उस बूढ़े आदमी के चेहरे पर जो संदेह था, वह सब कुछ बता रहा था। यह सीन दिखाता है कि रिश्तों में दरारें कब पड़ जाती हैं, पता ही नहीं चलता।
अचानक छत पर दिखाई दिया वह शख्स जिसके हाथ में कोड़ा था। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट का यह दृश्य बहुत सस्पेंस से भरा था। नीचे परिवार वाले तनाव में थे और ऊपर कोई उनकी हरकतों पर नजर रखे हुए था। यह कोण बहुत ही फिल्मी था और दर्शकों को यह अहसास दिलाता है कि खतरा हर दिशा से आ सकता है। उसका पोशाक और अंदाज बता रहा था कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है।
उस बूढ़े व्यक्ति के चेहरे पर जो चिंता की लकीरें थीं, वे सब कुछ कह रही थीं। निकम्मा का राइज: थ्रोन पलट में वह परिवार के मुखिया लग रहे थे, लेकिन उनकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। जब वह खड़े हुए और अपने हाथ जोड़कर कुछ बोले, तो लगा जैसे वे किसी बड़े संकट को टालने की कोशिश कर रहे हों। उनका अभिनय इतना स्वाभाविक था कि दर्शक भी उनके साथ उस तनाव को महसूस करने लगे।