निकम्मा का उदय: सिंहासन पलट का यह दृश्य रोंगटे खड़े कर देता है। नीले कपड़ों वाला पात्र शुरू में मुस्कुराता है, लेकिन फिर अचानक उसकी आँखों से खून बहने लगता है। यह दर्द और पागलपन का मिश्रण इतना तीव्र है कि दर्शक भी सिहर उठता है। बांस के जंगल का माहौल इस डरावने मोड़ को और भी गहरा बनाता है।
सफेद और काले मिश्रित वस्त्र पहने युवक की चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी है। निकम्मा का उदय: सिंहासन पलट में जब वह बिना हिले खड़ा रहता है और सामने वाला तड़पता है, तो लगता है जैसे वह किसी अलौकिक शक्ति का प्रयोग कर रहा हो। उसके माथे का लाल निशान शायद उसकी ताकत का स्रोत है, जो दुश्मनों को नष्ट कर रहा है।
लंबी सफेद दाढ़ी वाले बुजुर्ग का चेहरा देखकर लगता है कि वे इस सबके पीछे के राज को जानते हैं। निकम्मा का उदय: सिंहासन पलट के इस हिस्से में वे जिस तरह से काले कपड़ों वाले व्यक्ति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, उससे साफ है कि युद्ध नियंत्रण से बाहर जा रहा है। उनकी आँखों में भय और पछतावा दोनों साफ झलक रहे हैं।
शुरुआत में जो पात्र इतना घमंडी और खुश दिख रहा था, उसका यह हाल देखकर दिल दहल जाता है। निकम्मा का उदय: सिंहासन पलट में उसका चीखना और आँखों से खून बहना किसी श्राप जैसा लगता है। शायद उसने कोई गलती कर दी थी जिसकी कीमत उसे अपनी आँखों की रोशनी और मानसिक शांति गंवाकर चुकानी पड़ रही है।
इस पूरे हंगामे के बीच वह महिला पात्र जो सफेद और नीले कपड़ों में है, बिल्कुल शांत खड़ी है। निकम्मा का उदय: सिंहासन पलट में उसकी आँखों में आंसू हैं लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही। शायद वह इस हिंसक खेल की गवाह बनकर मजबूर है, या फिर वह जानती है कि अब कुछ नहीं किया जा सकता। उसका मौन सबसे ज्यादा शोर मचा रहा है।