जब सफेद पोशाक वाला योद्धा चाबुक को हवा में घुमाता है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। निकम्मा का उदय सिंहासन पलट में ऐसे एक्शन सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी आँखों में जो ठंडक है, वो किसी भी दुश्मन को डरा देने के लिए काफी है। कोर्टयार्ड का माहौल और दर्शकों की सांसें रुकी हुई हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारी भी।
वो जो नीली पोशाक पहने खड़ा है, उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा है जो बताता है कि वो सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि खेल का हिस्सा है। निकम्मा का उदय सिंहासन पलट में हर चेहरे के पीछे एक कहानी छुपी है। जब वो ऊपर देखकर मुस्कुराता है, तो लगता है जैसे वो जीत का जश्न मना रहा हो, भले ही लड़ाई अभी शुरू भी नहीं हुई।
काली पोशाक पर चांदी की नक्काशी और माथे पर पट्टी – ये कोई साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि कोई शक्तिशाली ठाकुर लगता है। निकम्मा का उदय सिंहासन पलट में उसकी हर हरकत में अधिकार झलकता है। जब वो उंगली उठाकर कुछ कहता है, तो लगता है जैसे पूरा दरबार उसकी बात सुनने के लिए तैयार हो। उसकी आवाज़ में दम है।
चेहरे पर निशान, आँखों में आग – ये योद्धा हारा नहीं, बल्कि और भी खतरनाक हो गया है। निकम्मा का उदय सिंहासन पलट में जब वो उंगली से इशारा करता है, तो लगता है जैसे वो अगली चाल की घोषणा कर रहा हो। उसकी हरकतें धीमी हैं, लेकिन हर एक में जान है। वो गिरता है, लेकिन हार नहीं मानता।
सफेद वस्त्र, लंबे काले बाल और शांत चेहरा – ये कोई साधु या गुप्त सलाहकार लगता है। निकम्मा का उदय सिंहासन पलट में वो बिना कुछ कहे भी सब कुछ कह जाता है। जब वो अपनी छाती पर हाथ रखकर बैठता है, तो लगता है जैसे वो पूरे युद्ध का परिणाम जानता हो। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है।