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गाँव का गौरववां27एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

१९९५ का रहस्य

१९९५ का पुराना कैलेंडर देखकर ही कहानी की शुरुआत बहुत रहस्यमयी तरीके से होती है। नीली सूट वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास देखते ही बनता है और वह बहुत शांत लग रहा था। काले सूट वाले के चेहरे पर पसीना और डर साफ़ दिख रहा था जो कि बहुत अच्छा था। गाँव का गौरव नामक इस कार्यक्रम में ऐसे ही रोमांचक मोड़ देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। कार्यालय का माहौल बहुत तनावपूर्ण था और हर पल कुछ होने वाला था।

झोले का राज़

अंत में वह बड़ा झोला लेकर जाता है और यह बात बहुत संदेहजनक लग रही थी। काले सूट वाला व्यक्ति क्यों डर गया और उसने क्या देखा था। शायद उसे कोई बड़ा राज़ पता चल गया हो जो उसने छुपाया था। गाँव का गौरव की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लग रहा है और आगे क्या होगा। अभिनय बहुत ही दमदार था और हर चेहरे के भाव सही जगह पर थे।

सत्ता का खेल

नीली सूट वाले की आँखों में एक अलग ही चमक थी जो उसकी ताकत को दिखा रही थी। वह कुर्सी पर ऐसे बैठता है जैसे असली मालिक हो और सब उसकी सुन रहे हों। सामने वाले की हालत खराब हो जाती है और वह कुछ बोल नहीं पाता था। गाँव का गौरव में ऐसे सत्ता का खेल देखना बहुत रोमांचक है और दिलचस्प लगता है। हर भाव मायने रखता है और कहानी आगे बढ़ती है।

कीमती चीज़

वह झोला साधारण नहीं लग रहा था और शायद उसमें कुछ बहुत कीमती चीज़ रखी हुई थी। काले सूट वाले ने दूरभाष चेक किया फिर अचानक घबरा गया और पसीने से तर बतर हो गया। गाँव का गौरव की पटकथा बहुत मज़बूत है और हर दृश्य में नयापन है। दर्शक को बांधे रखने की कला यहाँ दिखती है और लोग पसंद करते हैं। बहुत पसंद आया और बार-बार देखने को मन करता है।

झुक कर विदाई

अंत में झुक कर विदाई देना बहुत बड़ी बात है और इसका मतलब साफ़ है। इसका मतलब नीला सूट वाला ऊपर वाले पद पर है और सत्ता उसकी मुट्ठी में है। सत्ता का यह खेल बहुत गहरा है और खतरनाक भी हो सकता है। गाँव का गौरव में ऐसे राजनीतिक संकेत मिलते हैं जो सोचने पर मजबूर कर देते हैं। कार्यालय की सेटिंग बहुत असली लग रही थी और पुरानी थी।

पुरानी यादें

१९९५ का ज़माना था और तब भी ऐसे सौदे होते थे जो आज भी होते हैं। कैलेंडर का शॉट बहुत अच्छा था और समय को दर्शाता था। नीले सूट वाले की शांति डरावनी थी और वह कुछ बोलता नहीं था। गाँव का गौरव में समय की झलक बहुत अच्छे से दिखाई गई है और पुरानी यादें मिलती हैं। यह कार्यक्रम बहुत अच्छा है और सभी को देखना चाहिए।

भावों का बदलाव

काले सूट वाले के चेहरे के भाव बदलते रहते हैं और यह देखने में बहुत अच्छा लगता है। पहले हैरानी, फिर डर, फिर झुकना और अंत में सम्मान दिखाना। यह बदलाव बहुत अच्छा था और अभिनेता ने अच्छा किया। गाँव का गौरव में किरदारों की गहराई देखने लायक है और हर किरदार महत्वपूर्ण है। हर दृश्य में कुछ नया होता है और कहानी आगे बढ़ती है। बहुत रोचक लगा और मन बहल गया।

खामोशी की ताकत

नीली सूट वाला बिना कुछ बोले ही सब कह जाता है और उसकी खामोशी बोलती है। उसकी शारीरिक भाषा बहुत स्ट्रॉन्ग थी और वह आत्मविश्वास से भरा था। कुर्सी पर बैठने का तरीका ही सब बता रहा था और वह नेता लग रहा था। गाँव का गौरव में ऐसे बिना संवाद वाले दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं और असरदार हैं। चुप्पी भी शोर मचाती है और सब कुछ कह जाती है।

यादगार अंत

बैग उठाकर चलते वक्त उसकी चाल में रौब था और वह बहुत तेज़ी से चल रहा था। पीछे छूट गया व्यक्ति बस देखता रह गया और कुछ कर नहीं सकता था। यह अंत बहुत यादगार था और दिल पर असर करता है। गाँव का गौरव में ऐसे अंत बार-बार देखने को मिलते हैं और अच्छे लगते हैं। अगली कड़ी कब आएगी और क्या होगा यह जानना है।

बेहतरीन निर्माण

पूरा दृश्य बिना ज्यादा शोर के बहुत भारी था और दिल को छू गया। कार्यालय की सजावट और कपड़े उस ज़माने के थे और बहुत असली लगते थे। गाँव का गौरव की निर्माण गुणवत्ता बहुत अच्छी है और मेहनत दिखती है। ऐसे कार्यक्रम देखकर मन तृप्त हो जाता है और अच्छा लगता है। सभी को देखना चाहिए और पसंद आएगा यह कार्यक्रम। यह कहानी बहुत गहरी है और हर कोई इसे पसंद करेगा।