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गाँव का गौरववां56एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

माँ का दर्द और बेटे की चुप्पी

इस नाटक में माँ का दर्द बहुत गहरा दिखाया गया है। वह जमीन पर गिरकर चिल्लाती है और बेटे को कोसती है। गाँव का गौरव नामक इस शो में हर सीन दिल को छू लेता है। बेटे की चुप्पी में भी बहुत कुछ कहने को है। पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं जब वह अतीत को देखता है। यह रिश्ता बहुत जटिल लगता है। कोई आसान समाधान नहीं है।

काले और सफेद यादें

काले और सफेद दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं। एक छोटा बच्चा इतना बोझ कैसे उठा सकता है। कीचड़ में काम करना आसान नहीं था। गाँव का गौरव में दिखाया गया संघर्ष असली लगता है। उसने अपनी पढ़ाई की पर्ची फाड़ दी जो बहुत दुखद है। माँ की उम्मीदें और बेटे की मजबूरी साफ दिखती हैं। यह कहानी दिल को झकझोर देती है।

लाल जूतों का राज

लाल चमकदार जूते पहनकर वह नाटक कर रही है या सच में चोट लगी है। लाल जूते बहुत ध्यान खींचते हैं। गाँव का गौरव की कहानी में यह दृश्य बहुत महत्वपूर्ण है। बेटा खड़ा है पर हिल नहीं रहा। माँ मृत दादा की तरफ इशारा करती है। यह भावनात्मक ब्लैकमेलिंग लगती है। दर्शक हैरान रह जाते हैं। यह दृश्य यादगार बन गया है।

पसीने और गुस्से का मिश्रण

बेटे के चेहरे पर पसीना और गुस्सा दोनों हैं। उसने तौलिया गले में डाला है। गाँव का गौरव में किरदार बहुत असली लगते हैं। वह अपनी माँ को देख रहा है पर मदद नहीं कर रहा। शायद उसे लगता है कि यह नाटक है। पुराने घर की दीवारें भी गवाह बन रही हैं। यह कहानी बहुत आगे तक जाती है। सब कुछ स्पष्ट नहीं है।

आसमान फाड़ती चीख

जब वह ऊपर देखकर चिल्लाती है तो लगता है आसमान फट जाएगा। उसकी आवाज़ में दर्द है या नाटक। गाँव का गौरव में ऐसे सीन बार बार देखे जा सकते हैं। बेटे की आँखों में आँसू नहीं पर कठोरता है। शायद उसने बहुत कुछ सहन किया है। अब वह चुप नहीं रहेगा। यह संघर्ष बहुत गहरा है। हर कोई इससे सहमत होगा।

तस्वीर के सामने शर्मिंदगी

अंतिम संस्कार की तस्वीर सामने रखकर वह उसे शर्मिंदा कर रही है। यह बहुत क्रूर तरीका है। गाँव का गौरव में परिवार के रिश्ते टूटते दिखाए गए हैं। बेटा सीढ़ियों पर खड़ा है पर नीचे नहीं आता। माँ जमीन पर बैठकर रोती है। दोनों के बीच की दूरी बहुत स्पष्ट है। यह दृश्य बहुत भारी लगता है। दिल दहल जाता है।

बचपन की कमाई और आज का दिन

बचपन की मेहनत अब रंग लाई है पर माँ खुश नहीं है। वह कीचड़ में गिरा था अब वह साफ कपड़ों में है। गाँव का गौरव में यह विरोधाभास बहुत अच्छा है। माँ को लगता है वह उसे भूल गया है। पर बेटा जानता है सच्चाई क्या है। यह कहानी बहुत से लोगों की कहानी है। हर कोई इससे जुड़ सकता है। यह सच कड़वा है।

नेटशॉर्ट पर बेहतरीन कंटेंट

नेटशॉर्ट ऐप पर यह वीडियो देखकर मैं हैरान रह गया। एक्टिंग बहुत नेचुरल है। गाँव का गौरव की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत लगती है। माँ का गुस्सा और बेटे की चुप्पी दोनों बराबर हैं। कोई भी गलत नहीं लग रहा है। बस हालात ऐसे हैं। यह जीवन की कड़वी सच्चाई को दिखाता है। बहुत प्रभावशाली काम है। सबको देखना चाहिए।

कांपती उंगलियां और मौन

वह हाथ दिखाकर कुछ गिनती कर रही है या श्राप दे रही है। उंगलियां कांप रही हैं गुस्से से। गाँव का गौरव में हर एक्सप्रेशन मायने रखता है। बेटा पलटकर देखता है पर बात नहीं करता। शायद वह थक चुका है बहस से। अब वह सिर्फ काम करना चाहता है। यह मौन बहुत शोर मचाता है। दर्शक सोच में पड़ जाते हैं। यह अनोखा है।

घर के अंदर का तूफान

अंत में वह दोनों आमने सामने हैं पर बात नहीं हो रही। दूरी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। गाँव का गौरव का अंत कैसे होगा कोई नहीं जानता। माँ की आँखों में आंसू और बेटे की आँखों में आग है। यह जंग घर के अंदर लड़ी जा रही है। बाहर शांति है पर अंदर तूफान है। बहुत ही दमदार वीडियो है। इसे मिस मत करना।