PreviousLater
Close

गाँव का गौरववां42एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

भावनाओं का खेल

इस धारावाहिक गाँव का गौरव में बुजुर्ग की मुस्कान और आँसू देखकर दिल दहल गया। अंत्येष्टि के माहौल में भी कैसे कुछ लोग पैसों की दिखावा करते हैं। सफेद कमीज वाले शख्स की घमंडी हरकतें देखकर गुस्सा आया। जब तौलिया वाले शख्स ने चुपचाप पैसे उठाए, तो लगा अब बदला लेने का समय आ गया है। हर दृश्य में तनाव बना हुआ है।

अहंकार का अंत

गाँव का गौरव कहानी में जिस तरह से नीलामी की गई इज्जत को फिर से खरीदा गया, वो काबिले तारीफ है। लाल कपड़े वाली की हैरानी साफ झलक रही थी। नीले कोट वाले बुजुर्ग का गुस्सा आग की तरह था। पैसों को जमीन पर गिराना और फिर उन्हें समेटना, ये सब बहुत गहरा संदेश देता है। ऐसे किरदार हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं।

सम्मान की लड़ाई

इस शो गाँव का गौरव में दिखाया गया है कि कैसे पैसा इंसान को अंधा कर देता है। सफेद कमीज वाले शख्स को जब थप्पड़ मारा गया, तो स्क्रीन के बाहर भी आवाज सुनाई दी। तौलिया वाले शख्स की खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। अंत्येष्टि के मंडप में ऐसा व्यवहार बिल्कुल नहीं शोभा देता। कहानी बहुत ही दिलचस्प मोड़ ले रही है।

आँसू और गुस्सा

बुजुर्ग की आँखों में आँसू और चेहरे पर मुस्कान का विरोधाभास देखकर हैरानी हुई। गाँव का गौरव में ऐसे ही पल सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं। जब सफेद कमीज वाले शख्स ने नोट हवा में उड़ाए, तो लगा इंसानियत मर गई है। लेकिन अंत में जो हुआ, वो न्याय था। हर पात्र ने अपनी भूमिका बहुत अच्छे से निभाई है।

पैसों की खेलीगरी

इस धारावाहिक गाँव का गौरव में पैसों की ताकत और बेबसी को बहुत बखूबी दिखाया गया है। लाल कपड़े वाली का चेहरा देखकर लगा वो कुछ बोलना चाहती है पर डर रही है। नीले कोट वाले बुजुर्ग की आँखों में आक्रोश साफ दिख रहा था। ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। कहानी में उतार चढ़ाव बहुत अच्छे हैं।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down