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गाँव का गौरववां43एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंतिम संस्कार में तमाशा

अंतिम संस्कार के पवित्र माहौल में सिगरेट पीना कितना अजीब और बेइज्जती भरा लग रहा है। सफेद कमीज वाले की हरकतें देखकर मन में गुस्सा आ रहा है। क्या वह सच में परिवार की इज्जत की परवाह करता है या बस दिखावा कर रहा है। गाँव का गौरव में ऐसे दृश्य दिल को झकझोर देते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं। माहौल बहुत तनावपूर्ण है और हर कोई हैरान है।

पुराने फोन का कमाल

पुराना ब्रिक फोन देखकर हंसी आ गई क्योंकि यह आज के जमाने में बहुत दुर्लभ है। ग्रे रंग की कमीज वाले का किरदार बहुत मजेदार और अनोखा लग रहा है। उसकी एक्टिंग ने दृश्य को थोड़ा हल्का करने का काम किया। गाँव का गौरव की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत अच्छा लगा। कॉल करते समय उसके चेहरे के भाव देखने लायक थे और सबका ध्यान खींचा।

लाल पोशाक का राज

लाल पोशाक वाली महिला की मुस्कान इस दुख के माहौल में बिल्कुल फिट नहीं बैठ रही थी। फिर अचानक उसका हैरान होना और चौंक जाना बहुत दिलचस्प था। शायद उसे कोई बड़ा राज पता चला हो जो उसने नहीं सोचा था। गाँव का गौरव में किरदारों के बीच का खेल कमाल का है। हर किसी के चेहरे पर अलग ही कहानी लिखी हुई साफ दिख रही थी।

खामोशी का शोर

ग्रे शर्ट वाले की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है क्योंकि वह कुछ बोल नहीं रहा। वह शांत खड़ा है लेकिन उसकी आँखों में छिपा गुस्सा साफ दिख रहा है। सफेद कमीज वाले से उसकी बहस देखने लायक थी और बहुत तेज थी। गाँव का गौरव में ऐसे संवाद बहुत असरदार होते हैं और दिल पर चोट करते हैं। मुझे यह किरदार बहुत पसंद आ रहा है और उसका धैर्य।

छिपे हुए गवाह

बूढ़े दंपति का खंभे के पीछे छिपना बहुत मासूमियत भरा और डरावना था। उनकी हैरानी असली लग रही थी जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो। शायद वे भी इस साजिश का हिस्सा हैं या बस डरे हुए हैं। गाँव का गौरव में छोटे किरदार भी बड़ा असर डालते हैं और कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उनकी आँखों में डर और उत्सुकता दोनों साफ दिख रहे थे।

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