बुजुर्ग व्यक्ति की आवाज़ में गुस्सा साफ़ झलकता है। लगता है परिवार में कोई बड़ा विवाद चल रहा है। अंतिम संस्कार के माहौल में भी शांति नहीं है। गाँव का गौरव देखकर लगता है कि यह कहानी बहुत गहरी है। पात्रों के बीच की कशमकश दर्शनीय है। हर कोई अपनी बात मनवाना चाहता है। तनाव इतना है कि सांस रुक जाए।
जमीन पर पड़ा वह संदेश यंत्र कहानी का मोड़ बन गया। स्लेटी पोशाक वाले व्यक्ति की खुशी देखकर शक होता है। उसे कोई खास खबर मिल गई है। वंग जियानगुओ का नाम सुनकर सब चौंक गए। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं। यह छोटा सा यंत्र सब कुछ बदल सकता है। अब क्या होगा यह देखना बाकी है।
तौलिया गले में डाले युवक की हालत खराब लग रही है। वह कुछ बोलना चाहता है पर मजबूर है। उसकी आँखों में बेबसी और गुस्सा दोनों हैं। गाँव का गौरव की कहानी में वह मुख्य पात्र लगता है। उसके हाथ में तौलिया भी उसकी बेचैनी दिखा रहा है। वह चुपचाप सब सह रहा है पर अंदर से उबल रहा है।
गुलाबी वस्त्र वाली महिला के चेहरे पर हैरानी साफ़ है। पहले वह डरी हुई थी फिर सहमति देने लगी। स्लेटी पोशाक वाले के साथ उसका रिश्ता क्या है यह स्पष्ट नहीं है। गाँव का गौरव में रिश्तों की यह उलझन दिलचस्प है। वह उसका साथ दे रही है या मजबूरी में है। हर हावभाव में एक सवाल छिपा है।
अंतिम संस्कार की तस्वीर के सामने यह लड़ाई अनुचित लगती है। बुजुर्ग महिला भी चीख रही हैं। लगता है संपत्ति या अधिकार को लेकर झगड़ा है। गाँव का गौरव में पारिवारिक कलह बहुत तेज़ी से बढ़ता है। सफेद फूलों के बीच यह शोरगुल अजीब लग रहा है। सम्मान की कोई कद्र नहीं बची है अब।
स्लेटी पोशाक वाले व्यक्ति की हंसी बहुत रहस्यमयी है। उसे संदेश यंत्र का संदेश मिलते ही चेहरा बदल गया। वह जीत का जश्न मना रहा है जैसे। गाँव का गौरव में खलनायक ऐसा ही होता है। उसकी आँखों में चमक और चेहरे पर विजय भाव है। उसने कोई बड़ी चाल चल दी है अभी। सब हैरान हैं उसकी हरकत से।
यह दृश्य बहुत ही नाटकीय ढंग से फिल्माया गया है। दृश्य कोण और रोशनी बहुत सही है। गाँव का गौरव की निर्माण गुणवत्ता अच्छी लग रही है। पुराने जमाने का माहौल बखूबी बनाया गया है। दीवारों पर लिखे सुविचार भी कहानी का हिस्सा लगते हैं। हर छोटी चीज़ पर ध्यान दिया गया है निर्माताओं ने।
वंग जियानगुओ के आने की खबर से सबकी नींद उड़ गई। लगता है वह कोई बड़ा अधिकारी या दुश्मन है। गाँव का गौरव में बाहर से आने वाला इंसान तबाही लाता है। सबके चेहरे के रंग बदल गए हैं संदेश सुनकर। अब गाँव में कुछ बड़ा होने वाला है जरूर। यह शांति तूफान से पहले की है।
तौलिया वाले युवक ने अंत में मुंह फेर लिया। वह अब और नहीं सुनना चाहता। उसकी चुप्पी सबसे बड़ा शोर है। गाँव का गौरव में यह किरदार दर्शकों का पसंदीदा बन सकता है। वह मेहनतकश लगता है पर बेइज्जत हो रहा है। उसकी मुट्ठियां भिंची हुई हैं गुस्से में। वह जवाब जरूर देगा आगे चलकर।
इस मंच पर यह नाटक देखना बहुत रोमांचक है। कहानी में दम है और अभिनय भी बेहतरीन है। गाँव का गौरव जैसे कार्यक्रम कम ही देखने को मिलते हैं। हर कड़ी में नया मोड़ आता है। मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं। यह कहानी दिल से जुड़ती है बहुत जल्दी।