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गाँव का गौरववां7एपिसोड

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गाँव का गौरव

90 के दशक में, गाँव का लड़का बचपन से होशियार था, लेकिन खुद को मूर्ख बनाकर रखता था। उसने पढ़ाई का मौका अपने बड़े भाई और बड़ी बहन को दे दिया और खुद घर पर माँ-बाप के सूअर पालने के काम में हाथ बँटाने लगा। उसे जानवर पालने की बहुत अच्छी समझ थी, इसलिए गाँव के लोग उसकी तारीफ करते थे। फिर लड़के ने शहर जाकर अपने बड़े भाई और बहन से मिलने का फैसला किया। उन दोनों ने शहर में अपनी जगह बना ली थी, पर उन्होंने लड़के को नीचा दिखाते हुए कहा कि वह ठीक से काम नहीं करता, बूढ़े माँ-बाप की देखभाल नहीं करता...
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरी रात

इस दृश्य में तनाव बहुत ज्यादा है और सांस रुक सी जाती है। बुजुर्ग आदमी की आंखों में आंसू हैं और युवा शेफ शांत है। यह कहानी बहुत गहरी लग रही है। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ देखकर मजा आ गया। रात के बाजार का माहौल बहुत असली लग रहा है। पैसे गिनने का दृश्य कुछ संकेत देता है। क्या यह परिवार का झगड़ा है? मुझे अगली कड़ी देखने की जल्दी है। सबकी अभिनय लाजवाब है। संगीत भी बहुत अच्छा था।

लड़की की चुप्पी

लड़की की चिंता साफ दिख रही है। वह दोनों के बीच फंसी हुई लगती है। बुक में लिखा शब्द रहस्यमयी है। गाँव का गौरव की कहानी में यह नोटबुक अहम भूमिका निभा सकती है। खाने की दुकान पर यह बहस क्यों हो रही है? पुराने आदमी का गुस्सा और युवा का सब्र देखने लायक है। रात की रोशनी में यह नाटक और भी तनावपूर्ण लग रहा है। मुझे लगता है कुछ बड़ा होने वाला है।

नोटबुक का राज

नोटबुक वाला दृश्य बहुत हैरान करने वाला था। वह आदमी मुस्कुरा रहा था जब उसने वह दिखाया। गाँव का गौरव में ऐसे मोड़ की उम्मीद नहीं थी। पैसे की गड्डी देखकर लगता है सौदा हो रहा है। लेकिन युवा लड़का पीछे नहीं हट रहा है। उसकी आंखों में अलग ही चमक है। क्या वह अपनी दुकान बचा रहा है? यह सवाल मन में आ रहा है। दृश्य बहुत अच्छे से फिल्माया गया है।

पिता का दर्द

बुजुर्ग व्यक्ति का चेहरा देखकर लगता है वह टूट गया है। शायद वह पिता है जो अपने बेटे से नाराज है। गाँव का गौरव में रिश्तों की यह जंग दिल को छू लेती है। लड़की चुपचाप सब देख रही है। धुएं और ग्रिल की आवाज के बीच यह संवाद बहुत भारी लग रहा है। क्या पैसे से सब ठीक हो जाएगा? मुझे नहीं लगता। यह कहानी बहुत गहरी है।

बाजार का अंतर

रात के बाजार की भीड़ और यह निजी लड़ाई। अंतर बहुत अच्छा है। युवा शेफ का आत्मविश्वास काबिले तारीफ है। गाँव का गौरव में हर किरदार की अपनी कहानी है। वह तौलिये से हाथ पोंछता है और सामने खड़ा हो जाता है। यह भावनात्मक पल बहुत अच्छा लगा। पुराने आदमी की आवाज में दर्द था। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आ रहा है।

पैसा बनाम जज्बात

पैसे गिनने वाले हाथ और ग्रिल पर मांस। यह दृश्य बहुत प्रतीकात्मक है। गाँव का गौरव की कहानी में पैसा और जज्बात टकरा रहे हैं। वह आदमी जो नोटबुक लाया, वह कौन है? शायद वह वकील या दोस्त है। युवा लड़के ने पैसे लेने से मना कर दिया ऐसा लगता है। यह इज्जत की बात है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई।

नीली पोशाक का सच

लड़की की नीली पोशाक और उदास चेहरा। वह कुछ बोलना चाहती है पर चुप है। गाँव का गौरव में महिला किरदारों को भी अच्छे से लिखा गया है। बुजुर्ग आदमी चला गया लेकिन कहानी वहीं खत्म नहीं हुई। युवा लड़का अभी भी ग्रिल पर काम कर रहा है। उसका जुनून देखने लायक है। रात की ठंडी हवा में यह गर्माहट महसूस हुई। बहुत अच्छी कड़ी थी।

धैर्य की जीत

संवाद बहुत तेज और तीखे हैं। बुजुर्ग आदमी चिल्लाया लेकिन युवा लड़का शांत रहा। गाँव का गौरव में यह धैर्य की जीत है। नोटबुक में क्या लिखा था जो सब बदल गया? शायद कोई पुराना राज खुल गया है। मुझे यह रहस्य सुलझाना है। दृश्य की रोशनी बहुत भावपूर्ण है। चेहरों के भाव साफ दिख रहे हैं। यह नाटक नीरस नहीं है।

खुशबू और गुस्सा

खाने की खुशबू और गुस्से की बदबू। यह मिश्रण अजीब है। गाँव का गौरव में ऐसे सीन बार-बार देखने को मिलते हैं। वह आदमी जो पीछे खड़ा था, वह भी हैरान था। सबकी नजरें उस युवा लड़के पर थीं। क्या वह सच में गलत है? या वह सही साबित होगा? मुझे अगले भाग का इंतजार है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा।

सन्नाटे का अंत

अंत में जब वे चले गए, तो सन्नाटा छा गया। गाँव का गौरव का यह दृश्य याद रहेगा। युवा लड़के ने फिर से खाना बनाना शुरू कर दिया। जीवन चलता रहता है। पैसे और रिश्तों का यह खेल कब तक चलेगा? मुझे लगता है लड़की वापस आएगी। यह कहानी में मोड़ ला सकती है। बहुत ही दमदार प्रदर्शन था सभी का।