नीली रोशनी में अकेले बैठे नायक की आँखों में जो टूटन है, वो हज़ार शब्दों से ज़्यादा बोलती है। जब फ्लैशबैक में उस पर हमला होता है और वो लड़की उसे बचाती है, तो लगता है जैसे ज़िद्द का अंजाम हमेशा खूनी नहीं होता, कभी-कभी ये प्यार की शुरुआत भी बन सकता है। उस बूढ़े आदमी का आना और नायक को संभालना दिखाता है कि परिवार की जड़ें अभी भी मज़बूत हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल मोड़ देखना दिल को छू लेता है, बिल्कुल असली लगता है।