अस्पताल के कमरे में सन्नाटा चीख रहा है जब वह बुजुर्ग व्यक्ति तलाक के कागजात लेकर आता है। लड़की की आँखों में बेबसी और टूटे हुए सपने साफ दिख रहे हैं। फिर फ्लैशबैक में उस शख्स का रवैया देखकर गुस्सा आता है जो फोन पर बात करते हुए कितना बेफिक्र है। जब वह लड़की के गले को छूता है तो लगता है जैसे जख्म पर नमक छिड़क दिया हो। आखिर में कार्ड और दस्तखत का सीन देखकर दिल भारी हो गया। ज़िद्द का अंजाम हमेशा ऐसा ही कड़वा होता है जब इंसान अपनी जिद में अंधा हो जाता है।