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(डबिंग) साँप की शुरुआतवां45एपिसोड

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(डबिंग) साँप की शुरुआत

राहुल कपूर अचानक एक ऐसे संसार में पहुँच जाता है जहाँ लोग पशु नियंत्रक हैं। वहाँ वह एक कमजोर और उपहास का पात्र “सर्प” बन जाता है, जिसे रिया मल्होत्रा भी नापसंद करती है। मौत के करीब पहुँचने पर वह अवशोषण विकास प्रणाली सक्रिय करता है और छाया भेड़िया जैसे जीवों को निगलते हुए लगातार विकसित होता है। धीरे-धीरे वह साधारण सर्प से शक्तिशाली नाग बनकर अंततः विश्व को भयभीत करने वाला महान ड्रैगन बन जाता है। वैश्विक पशु प्रलय और खतरनाक शत्रुओं के बीच, वह मानवता के साथ मिलकर लड़ता है और सर्वोच्च शक्ति।
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इस एपिसोड की समीक्षा

विज्ञान का चमत्कार या खतरा

वैज्ञानिक की आँखों में वो चमक देखकर लगता है कि उन्हें किसी बड़ी खोज की खुशी है। साँप के शल्क और खून से ऐसी तकनीक बनाना आसान नहीं होता। (डबिंग) साँप की शुरुआत में दिखाया गया विज्ञान काफी एडवांस लग रहा है। होलोग्राम स्क्रीन पर साँप का एनालिसिस देखकर रोंगटे खड़े हो गए। क्या सच में यह इंसानियत के लिए वरदान है या किसी बड़ी मुसीबत की शुरुआत? वैज्ञानिक की बातों में एक अजीब सा जोश है जो खतरनाक भी हो सकता है। मुझे यह साइंस फिक्शन अंदाज बहुत पसंद आया।

भरोसे का संकट

मीटिंग रूम में बैठे उन अधिकारियों के बीच की बहस देखकर लग रहा है कि भरोसा टूटने वाला है। एक तरफ युवा ऑफिसर राहुल कपूर का बचाव कर रहा है तो दूसरी तरफ बूढ़े जनरल को शक है। (डबिंग) साँप की शुरुआत की कहानी में यह कन्फ्लिक्ट बहुत गहरा है। जब देश की सुरक्षा का सवाल हो तो शक जायज है, लेकिन बिना सबूत के किसी को गद्दार कहना सही नहीं। उस युवा ऑफिसर की आँखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। आगे क्या होगा यह जानने के लिए मैं बेचैन हूँ।

खतरनाक हथियार

साँप के शल्क को पीसकर बुलेट बनाना किसी जादू से कम नहीं लगता। वैज्ञानिक दावा कर रहे हैं कि यह तकनीक पचास साल आगे की है। (डबिंग) साँप की शुरुआत में दिखाई गई यह हथियार प्रणाली काफी खतरनाक लग रही है। ए ग्रेड राक्षसी पशु का कवच भी इससे फट सकता है तो सोचिए ताकत कितनी होगी। लेकिन क्या इतनी ताकत इंसान के काबू में रहेगी? स्क्रीन पर दिखाई गई बुलेट का डिजाइन बहुत ही फ्यूचरिस्टिक था। तकनीक का यह पहलू मुझे काफी रोचक लगा।

राहुल कपूर का रहस्य

राहुल कपूर का नाम बार बार लिया जा रहा है लेकिन वह सामने नहीं है। लगता है कि वह किसी बहुत बड़ी जिम्मेदारी पर है। (डबिंग) साँप की शुरुआत में इस किरदार की अहमियत बहुत बढ़ गई है। पश्चिमी शहर को बचाने का श्रेय उसे दिया जा रहा है। फिर भी कुछ लोग उसे भरोसेमंद नहीं मान रहे। यह राजनीति और सुरक्षा के बीच की लड़ाई बहुत तेज हो गई है। उस युवा ऑफिसर ने जब मुक्का मेज पर मारा तो लग गया कि अब बात बिगड़ सकती है।

भेड़िया पालने की कहानी

घर में भेड़िया पालने वाली बात सुनकर तो सच में डर लग गया। बूढ़े जनरल का डर जायज है क्योंकि ताकतवर होकर कोई भी पलट सकता है। (डबिंग) साँप की शुरुआत में यह डायलॉग बहुत भारी था। जब पंख मजबूत होंगे तो सबसे पहले हमें ही निगलेगा, यह बात दिल को छू गई। क्या सच में यह तकनीक देश के लिए खतरा बन जाएगी? मीटिंग में बैठे सभी के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। यह अनिश्चितता ही इस कहानी की जान है।

दृश्य शैली शानदार

लैब के सीन में नीली रोशनी और होलोग्राम का इस्तेमाल बहुत शानदार किया गया है। वैज्ञानिक जब स्क्रीन पर ग्राफ दिखा रहे थे तो लगा कि मैं किसी असली लैब में हूँ। (डबिंग) साँप की शुरुआत का दृश्य शैली बहुत ही आधुनिक है। साँप की डीएनए संरचना को इतने बारीक से दिखाना आसान काम नहीं है। एनिमेशन की क्वालिटी देखकर लगता है कि इस पर काफी मेहनत की गई है। तकनीकी विवरण को दिखाने का तरीका बहुत ही प्रभावशाली था। दर्शकों के लिए यह एक दृश्य अनुभव है।

वफादारी की परीक्षा

युवा ऑफिसर की वफादारी देखकर लगता है कि राहुल कपूर ने सच में कुछ कमाल किया है। वह गुस्से में चिल्लाया कि चुप रहो और सबूत की बात की। (डबिंग) साँप की शुरुआत में यह किरदार बहुत दमदार लग रहा है। बिना उसके पश्चिमी शहर तबाह हो चुका होता, यह बात सबको चुभ रही है। फिर भी बुजुर्ग अधिकारी मानने को तैयार नहीं हैं। यह पीढ़ियों के बीच का मतभेद बहुत गहरा दिखाया गया है। मुझे यह ड्रामा बहुत पसंद आ रहा है।

दोधारी तलवार

साँप की जीव विज्ञान पर इतनी रिसर्च करना खतरनाक भी हो सकता है। वैज्ञानिक कह रहे हैं कि यह चिकित्सा और जीवविज्ञान दोनों का चमत्कार है। (डबिंग) साँप की शुरुआत में यह दोधारी तलवार वाली बात बहुत सही कही गई है। एक तरफ इलाज है तो दूसरी तरफ विनाश का रास्ता भी खुल सकता है। स्क्रीन पर दिखाई गई ऊर्जा उत्प्रेरक की ग्राफ बहुत जटिल लग रही थी। क्या इंसान कुदरत के नियमों के साथ खेल रहा है? यह सवाल बार बार दिमाग में आ रहा है।

मीटिंग का तनाव

मीटिंग टेबल पर होलोग्राम शहर का मॉडल देखकर लगा कि स्ट्रेटेजी बहुत गंभीर है। सभी अधिकारी यूनिफॉर्म में बहुत सख्त लग रहे थे। (डबिंग) साँप की शुरुआत में मिलिट्री का माहौल बहुत असली लगा है। मेज पर मुक्का मारने वाले सीन में जो एनर्जी थी वह बता रही है कि बात बहुत आगे बढ़ चुकी है। क्या अब युद्ध की नौबत आ जाएगी? हर किरदार की बॉडी लैंग्वेज से कहानी साफ हो रही है। यह तनाव बना रहे तो मजा आएगा।

दार्शनिक पक्ष

अंत में जब जनरल ने कहा कि जो अपना नहीं उसका दिल कभी अपना नहीं होता, तो सन्नाटा छा गया। यह बात सिर्फ राहुल कपूर पर नहीं बल्कि पूरी स्थिति पर लागू होती है। (डबिंग) साँप की शुरुआत की कहानी में यह दार्शनिक पक्ष बहुत गहरा है। क्या तकनीक का इस्तेमाल करने वाले कभी उसके गुलाम नहीं बन जाते? यह सवाल बहुत बड़ा है। नेटशॉर्ट मंच पर यह सीरीज देखने का अनुभव काफी रोमांचक रहा है। आगे की कड़ी का इंतजार रहेगा।