क्लब प्रेसिडेंट की चालाकी और लू मिंग की मजबूरी का टकराव देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वो सुनहरी घड़ी और ठंडी मुस्कान बताती है कि बिजनेस में इमोशन की कोई जगह नहीं। लेकिन लू मिंग ने साबित कर दिया कि टैलेंट कभी बूढ़ा नहीं होता। पंचदीपा की फुटबॉल टीम की यह कहानी हर एथलीट के लिए प्रेरणा है।
जब खबर फैली कि लू मिंग ने साइन किया, तो इंटरनेट पर हंगामा मच गया। कुछ ने कहा कॉन्ट्रैक्ट अनफेयर है, तो कुछ ने कहा वो चल भी नहीं सकता। लेकिन नेटिजन्स की आवाज़ में जो सपोर्ट है, वो किसी भी नेगेटिविटी से बड़ा है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के फैंस की यह वफादारी देखकर गर्व होता है।
ब्लॉन्ड दोस्त का गुस्सा जायज है। वो जानता है कि लू मिंग के साथ क्या हुआ है। अस्पताल के कमरे में उसकी चीखें सिर्फ गुस्सा नहीं, बेबसी भी हैं। लेकिन लू मिंग का शांत रहना और संतरे को छीलना यह दिखाता है कि उसने अपना रास्ता चुन लिया है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम में ऐसे रिश्ते ही जान डालते हैं।
प्लास्टर में लिपटा पैर और आँखों में चमक। लू मिंग की वापसी की कहानी किसी सुपरहीरो मूवी से कम नहीं। वो दर्द को पीछे छोड़कर मैदान में उतरने के लिए तैयार है। यह सीन देखकर यकीन होता है कि इंसान की इच्छाशक्ति पहाड़ तोड़ सकती है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम की यह स्क्रिप्ट बेमिसाल है।
लकड़ी की मेज, लाल दीवारें और प्रेसिडेंट की ठंडी आँखें। यह ऑफिस सिर्फ एक कमरा नहीं, पावर का प्रतीक है। जब वो उंगली उठाकर आदेश देता है, तो लगता है कि वह किसी शतरंज की बाजी खेल रहा है। लू मिंग इस खेल का सबसे अहम मोहरा बन गया है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम का यह ड्रामा बहुत गहरा है।