जब कोच ने हाथ उठाकर तीन उंगलियां दिखाईं, तो लगा जैसे समय थम गया हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए ये सिर्फ एक गेम नहीं, इज्जत का सवाल बन गया है। कोच की आवाज में जो गुस्सा और उम्मीद दोनों थीं, वो किसी भी स्पोर्ट्स ड्रामा से कम नहीं। फायर बैकग्राउंड के साथ उसका एंट्री सीन तो बस मास्टरपीस था।
नंबर १८ का किरदार सबसे ज्यादा दिल को छू गया। शुरू में वो रो रहा था, लेकिन फिर अचानक उसमें जो बदलाव आया, वो जादू जैसा लगा। पंचदीपा की फुटबॉल टीम में ऐसे प्लेयर्स की जरूरत होती है जो हार के बाद भी उठ खड़े हों। उसकी मुट्ठियां भिंचाने का तरीका और चेहरे पर पसीना, सब कुछ परफेक्ट था।
सफेद बालों वाले कैप्टन के पैर की चोट देखकर लगता है कि उसने मैच में सब कुछ दांव पर लगा दिया था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए वो सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि जान है। बैंडेज खोलते वक्त का दर्द और फिर भी मैदान में उतरने की जिद्द, ये सीन किसी भी एथलीट के दिल को छू लेगा।
शुरुआत में पूरा लॉकर रूम सन्नाटे में डूबा था, हर कोई अपने आप में खोया हुआ। लेकिन जैसे ही कैप्टन चिल्लाया, सबकी नींद टूट गई। पंचदीपा की फुटबॉल टीम की ये कहानी बताती है कि कभी-कभी एक आवाज पूरी टीम को बदल सकती है। हर प्लेयर का रिएक्शन अलग-अलग था, जो रियलिस्टिक लगा।
अंत में कैप्टन की आँखों का क्लोजअप शॉट तो बस कमाल का था। लाल चमकती आँखें और चेहरे पर वो मुस्कान, जो कह रही थी कि अब खेल शुरू होगा। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए ये सिर्फ एक मैच नहीं, बदले की आग है। एनिमेशन स्टाइल और कलर ग्रेडिंग ने इस सीन को और भी ड्रामेटिक बना दिया।