जब उस नीले बालों वाले योद्धा ने अपनी तलवारें बुलाईं, तो पूरा मैदान कांप उठा। उसकी आँखों में जो ठंडक थी, वो किसी बर्फ़ीले तूफ़ान से कम नहीं थी। बाघ राजा का जन्म तो हुआ ही था, पर ये तो लगता है जैसे स्वयं देवता उतर आए हों। हर फ्रेम में इतनी ताकत है कि सांस रुक जाए।
पहले वो इतना घमंडी लग रहा था, जैसे दुनिया जीत ली हो। लेकिन जब नीले योद्धा ने एक झटके में सारी सेना खत्म कर दी, तो उसके चेहरे का रंग उड़ गया। बाघ राजा का जन्म के बाद की ये तबाही देखकर लगता है कि अहंकार का अंत हमेशा दर्दनाक होता है। उसकी आँखों में डर साफ़ दिख रहा था।
भेड़िया, तेंदुआ, घोड़ा – सबकी आँखों में वही सवाल था – 'क्या ये इंसान है या कोई दैत्य?' उनकी सांसें थम सी गई थीं। बाघ राजा का जन्म के बाद की ये तबाही देखकर लगता है कि प्रकृति भी इस शक्ति के आगे झुक गई है। हर जानवर की आँखों में वही सवाल था – 'क्या ये इंसान है या कोई दैत्य?'
उस बूढ़े ऋषि की आँखों में जो चमक थी, वो सिर्फ डर नहीं थी – वो तो भविष्य का अंधेरा देख रही थी। उसकी पुतलियों में युद्ध का दृश्य साफ़ दिख रहा था। बाघ राजा का जन्म के बाद की ये तबाही देखकर लगता है कि वो जानता था कि ये दिन आएगा। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी।
उसकी मुस्कान इतनी शांत थी, जैसे उसने कोई छोटा सा काम किया हो। लेकिन उसके पीछे पड़ी लाशें बता रही थीं कि ये कोई साधारण युद्ध नहीं था। बाघ राजा का जन्म के बाद की ये तबाही देखकर लगता है कि वो अपनी शक्ति से खेल रहा था। उसकी आँखों में कोई पछतावा नहीं, बस एक अजीब सी संतुष्टि थी।