जब बाघों की बस्ती में जश्न का माहौल था, तभी भालूओं का झुंड आया। लेकिन उनकी हिम्मत टूट गई जब उन्होंने बाघों का जोश देखा। बाघ राजा का जन्म ऐसे ही माहौल में हुआ लगता है, जहां डर और जीत का खेल चलता है। भालू का चेहरा देखकर हंसी भी आती है और डर भी।
नीले कवच वाला योद्धा जब सामने आया, तो सबकी सांसें रुक गईं। उसकी आंखों में चमक और हाथ में जादूई शक्ति ने भालू को हिला दिया। बाघ राजा का जन्म शायद इसी शक्ति से हुआ होगा। ऐसा लगता है कि वह अकेले ही पूरी सेना को हरा सकता है।
भालू शुरू में बहुत घमंडी लग रहा था, लेकिन नीले योद्धे के सामने उसकी सारी ताकत फीकी पड़ गई। जब वह जमीन पर गिरा, तो लगा कि अहंकार का अंत हो गया। बाघ राजा का जन्म ऐसे ही सबक से जुड़ा है, जहां ताकत नहीं, बुद्धि जीतती है।
छोटे बाघ बच्चे जब खुशी से उछल रहे थे, तो लगा कि जंगल में सच्ची खुशी क्या होती है। उनकी मासूमियत और जोश देखकर दिल खुश हो गया। बाघ राजा का जन्म शायद इनहीं बच्चों में से किसी एक का होगा, जो भविष्य में राजा बनेगा।
जब नीले योद्धे ने एक इशारा किया, तो भालूओं का झुंड भाग खड़ा हुआ। उनका डर इतना साफ था कि लग रहा था जैसे वे कभी वापस नहीं आएंगे। बाघ राजा का जन्म ऐसे ही विजय के पल में हुआ होगा, जब दुश्मन भाग खड़े होते हैं।