जब बाघ राजा का जन्म हुआ, तो पूरा गाँव जल रहा था। उसकी आँखों में डर नहीं, गुस्सा था। वह छोटी बच्ची को बचाने के लिए लड़ी, जैसे कोई माँ अपने बच्चे के लिए लड़ती है। आग के बीच उसकी चमकती आँखें दिल को छू गईं।
उसका आना ऐसा था जैसे आसमान से देवता उतरे हों। नीले बाल, नीली कवच, और आँखों में शांति। जब उसने हाथ उठाया, तो आग भी रुक गई। बाघ राजा का जन्म उसके सामने ही हुआ, और वह सब देख रहा था — बिना हिले, बिना डरे।
वह छोटी हिरणी जब चीखी, तो मेरा दिल भी चीख उठा। उसकी आँखों में आँसू, और चेहरे पर डर — ऐसा लगा जैसे मैं खुद उस जगह खड़ा हूँ। बाघ राजा का जन्म उसके सामने हुआ, और वह बस देखती रही — बेबस, टूटी हुई।
उसकी गति बिजली जैसी थी। एक पल में वह सामने थी, अगले पल में दुश्मन जमीन पर। उसके नाखून चमक रहे थे, और आँखों में आग। बाघ राजा का जन्म उसके वार के बाद हुआ — जैसे वह खुद उसकी माँ हो।
वह बड़ा था, ताकतवर था, लेकिन अंत में बस एक टूटा हुआ शरीर था। उसकी आँखें बुझ रही थीं, और मुँह से खून बह रहा था। बाघ राजा का जन्म उसके खून से हुआ — जैसे प्रकृति का नियम हो।