स्कोरबोर्ड पर ४-० देखकर लाल टीम के खिलाड़ियों का हौसला टूट गया। गोलकीपर का रोना और मैदान पर गिर जाना दिल दहला देने वाला था। वहीं बैंगनी टीम का घमंड और हंसी-मजाक उनकी जीत का असली कारण बना। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने दिखाया कि कैसे मनोवैज्ञानिक दबाव से विरोधी को हराया जा सकता है।
लाल जर्सी में सफेद बालों वाला खिलाड़ी मैच का असली हीरो लगा। उसका फ्लाइंग किक और गोल करने का अंदाज कमाल का था। भले ही टीम हार गई, लेकिन उसकी आंखों में हार न मानने का जज्बा साफ दिख रहा था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के इस किरदार ने सबका ध्यान खींच लिया। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी।
ड्रेसिंग रूम में बैठे कोच का चेहरा देखकर मैच का हाल पता चल गया। पहले वह सिर पकड़कर बैठे थे, लेकिन जब गोल हुआ तो उनका उत्साह देखने लायक था। भीड़ का शोर और कोच की खुशी ने मैच के क्लाइमेक्स को और भी रोमांचक बना दिया। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के इस सीन ने मैच के बाहर का नजरिया भी दिखाया।
बैंगनी जर्सी वाले नंबर १६ का व्यवहार बहुत संदिग्ध था। वह कभी मुस्कुराता, कभी डराता, और कभी टीम के साथ हंसता। क्या यह खेल का हिस्सा था या फिर कुछ गड़बड़? पंचदीपा की फुटबॉल टीम के इस खिलाड़ी ने साबित किया कि फुटबॉल सिर्फ पैरों से नहीं, दिमाग से भी खेला जाता है। उसकी चालाकी ने सबको हैरान कर दिया।
लाल जर्सी वाले खिलाड़ी के पैर से खून बहना और दर्द से तड़पना बहुत रियल लगा। विरोधी टीम का लापरवाह टैकल खेल की भावना को खत्म कर रहा था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के इस सीन ने दिखाया कि खेल के मैदान में कितनी हिंसा छिपी हो सकती है। दर्शकों की आवाजें और खिलाड़ी का दर्द एक अजीब माहौल बना रहे थे।