जब हीरो ने उस नीले होलोग्राफिक स्क्रीन पर टैप किया और टॉवर में एंट्री ली, तो माहौल एकदम बदल गया। स्टारी नाइट स्काई के नीचे उस मैदान में खड़ा होना और सामने उस डरावने सुअर जैसे राक्षस को देखना रोंगटे खड़े कर देने वाला था। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में दिखाया गया यह संघर्ष सच में दिलचस्प है। हीरो का शांत रहना और कीड़े का अचानक हमलावर बन जाना, यह कॉम्बिनेशन दर्शकों को बांधे रखता है।
इस वीडियो में हीरो और उसके हरे कीड़े के बीच का बॉन्डिंग बहुत प्यारा है। जब कीड़ा थक कर गिर जाता है और हीरो उसे सहारा देता है, तो लगता है कि ये सिर्फ लड़ने वाले नहीं बल्कि सच्चे साथी हैं। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की कहानी में यही इमोशनल कनेक्शन सबसे खास है। खतरे के समय एक दूसरे की रक्षा करना और जीत के बाद खुशी मनाना, ये सीन्स दिल को छू लेते हैं। ऐसा दोस्त हर किसी को चाहिए।
जब वह राक्षस जमीन तोड़कर बाहर आया और उसकी आंखें लाल चमकने लगीं, तो विजुअल इफेक्ट्स सच में लाजवाब थे। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में इस्तेमाल की गई एनिमेशन तकनीक ने हर एक्शन सीन को जीवंत बना दिया है। कीड़े द्वारा हरी लेजर बीम छोड़ना और राक्षस का टकराना, इन सभी दृश्यों में रंगों का खेल और स्पीड बहुत प्रभावशाली है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट देखना एक अलग ही अनुभव है।
सबसे हैरान करने वाला पल तब आया जब उस प्यारे से कीड़े ने अपना मुंह खोला और उसके नुकीले दांत दिखाई दिए। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में यह ट्विस्ट सच में शानदार था। हमें लगता था कि यह बेचारा है, लेकिन असल में यह शिकारी है। उसने राक्षस को निगल लिया और फिर चमकते हुए बाहर आया, यह सीन देखकर मजा आ गया। ऐसे अनपेक्षित मोड़ कहानी को और भी रोमांचक बनाते हैं।
हीरो का किरदार बहुत ही शांत और गंभीर है। जब सामने इतना बड़ा खतरा खड़ा था, तब भी उसने घबराहट नहीं दिखाई। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में उसकी आंखों में जो आत्मविश्वास था, वह काबिले तारीफ है। उसने अपने साथी पर भरोसा किया और सही समय पर रणनीति बनाई। ऐसे किरदार दर्शकों को प्रेरित करते हैं कि मुश्किल वक्त में धैर्य कैसे नहीं खोना चाहिए। उसकी स्माइल जीत के बाद सब कुछ कह जाती है।