भीड़ में खड़े छात्रों के चेहरे पर जो डर था, वह बिल्कुल असली लग रहा था। कोई घुटनों पर गिरा, कोई चीख रहा था। लेकिन बीच में खड़ा वह लड़का, जिसने हाथ उठाकर चुनौती स्वीकार की, उसका आत्मविश्वास देखकर रोंगटे खड़े हो गए। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पल ही तो दर्शकों को बांधे रखते हैं।
उस नीले ड्रेगन की आंखें सिर्फ चमकदार नहीं थीं, उनमें एक अजीब सी गहराई थी, जैसे वे सीधे आत्मा में झांक रही हों। जब उसने दहाड़ मारी, तो लगता था जैसे पूरा मैदान कांप उठा हो। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की यह दृश्य डिजाइन इतनी बारीकी से किया गया है कि हर फ्रेम एक पेंटिंग लगता है।
पहले वह इतना घमंडी लग रहा था, जैसे दुनिया उसकी मुट्ठी में हो। लेकिन जब नीला ड्रेगन आया, तो उसके चेहरे पर पसीना और आंखों में हैरानी साफ दिख रही थी। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे किरदारों का पतन देखना सबसे ज्यादा मजेदार होता है। उसकी आवाज में अब वह आत्मविश्वास नहीं था।
जिस मैदान में यह सब हो रहा था, उस पर बने चिह्न प्राचीन जादू की याद दिला रहे थे। जब दोनों ड्रेगन आमने-सामने आए, तो लगता था जैसे दो देवताओं का युद्ध हो रहा हो। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की यह सेटिंग इतनी भव्य है कि आप खुद को उस दुनिया में खोया हुआ महसूस करते हैं।
वह लड़की जो घुटनों पर गिर गई थी, उसकी आंखों में डर के बाद भी एक अजीब सी चमक थी। जैसे वह जानती हो कि कुछ बड़ा होने वाला है। पशु साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे छोटे-छोटे किरदार भी कहानी का अहम हिस्सा बन जाते हैं। उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।