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पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँवां46एपिसोड

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पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ

परिवार से निकाले गए नाजायज़ बेटे मो में दुर्लभ “सभी तत्व” वाली पशु-साथी क्षमता जागी। गरीबी के कारण कोई भी साधारण आत्मा उससे जुड़ना नहीं चाहता था, पूरा स्कूल उसका मज़ाक उड़ाता था। उसके सौतेले भाई फान और पूर्व प्रेमिका बर्फ ने मिलकर उसे बदनाम किया। इसी अपमान ने उसके अंदर “सबसे शक्तिशाली आदिम-पशु प्रणाली” को जगा दिया। ऐसे युग में जहाँ हर कोई अपने पशु-साथियों को विकसित करता था, मो ने एक तुच्छ हरी इल्ली को आदिम रूप में लौटाकर सबसे शक्तिशाली पशु—आकाशीय ड्रैगन—में बदल दिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

नीले ड्रैगन की शक्ति

मुख्य पात्र के कंधे पर बैठे उस छोटे नीले ड्रैगन ने पूरा माहौल बदल दिया। जब वह सामने खड़ा हुआ, तो हवा में एक अलग ही ऊर्जा थी। 'पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ' की कहानी में यह साबित करता है कि असली ताकत शोर मचाने में नहीं, बल्कि शांत रहने में है। उसकी आँखों में जो ठंडक थी, वह किसी तूफान से कम नहीं थी। नेटशॉर्ट पर ऐसे एपिसोड देखना सुकून देता है।

गुरु का क्रोध

उस बुजुग व्यक्ति की आँखों में जब गुस्सा था, तो पूरा मैदान सन्न रह गया। उसने न केवल उस बदमाश लड़के को सबक सिखाया, बल्कि भीड़ को भी चुप करा दिया। 'पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ' में अनुशासन का यह पाठ बहुत गहरा था। जब उसने हरे रंग की अंगूठी पहनी उंगली से इशारा किया, तो लगा जैसे समय थम गया हो। ऐसे मेंटोर हर स्कूल में होने चाहिए।

बारिश का माहौल

जब वह लड़का सूटकेस लेकर बारिश में अकेला चल रहा था, तो स्क्रीन पर उदासी छा गई। 'पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ' ने इस दृश्य के जरिए दिखाया कि गलतियों की कीमत कितनी भारी हो सकती है। भीगते हुए भी उसका सिर झुका हुआ था, जो उसके पछतावे को बयां कर रहा था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

भीड़ की प्रतिक्रिया

पीछे खड़े छात्रों के चेहरे पर जो डर और हैरानी थी, वह सब कुछ कह रही थी। जब सफेद बालों वाला लड़का जमीन पर गिरा, तो सबकी सांसें रुक गईं। 'पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ' में भीड़ का रिएक्शन इस बात का सबूत है कि सत्ता कैसे बदलती है। किसी ने मुंह पर हाथ रखा, तो कोई बस देखता रह गया। यह सामूहिक झटका बहुत रियल लगा।

शांत नायक की जीत

बिना कुछ बोले, बिना गुस्सा किए, उस काले बालों वाले लड़के ने सबका ध्यान खींच लिया। 'पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ' में उसकी चुप्पी सबसे बड़ी ताकत थी। जब वह सूरज की रोशनी में खड़ा हुआ, तो लगा जैसे हीरो एंट्री ले रहा हो। उसकी आँखों में जो आत्मविश्वास था, वह हजारों शब्दों से भारी था। नेटशॉर्ट पर ऐसे किरदार देखना पसंद आता है।

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