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जब कमांडर ने कुछ घोषणा की, तो छात्रों के चेहरों पर जो डर और घबराहट थी, वह बहुत ही रियलिस्टिक लगी। कुछ छात्र फुसफुसा रहे थे, कुछ पसीने से तर-बतर थे। यह दृश्य दिखाता है कि इस दुनिया में कितना दबाव है। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे छोटे-छोटे डिटेल ही कहानी को गहराई देते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन देखना सच में दिल को छू लेता है।
कमांडर का किरदार बहुत ही प्रभावशाली था। उसकी सख्त आवाज, गंभीर चेहरा और हाथ में फाइल लिए खड़ा होना – सब कुछ एक अनुशासित नेता जैसा लग रहा था। जब उसने छात्रों को संबोधित किया, तो लगा जैसे कोई बड़ी घोषणा होने वाली है। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे किरदार ही कहानी में वजन डालते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना सच में इंटरेस्टिंग है।