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पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँवां50एपिसोड

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पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ

परिवार से निकाले गए नाजायज़ बेटे मो में दुर्लभ “सभी तत्व” वाली पशु-साथी क्षमता जागी। गरीबी के कारण कोई भी साधारण आत्मा उससे जुड़ना नहीं चाहता था, पूरा स्कूल उसका मज़ाक उड़ाता था। उसके सौतेले भाई फान और पूर्व प्रेमिका बर्फ ने मिलकर उसे बदनाम किया। इसी अपमान ने उसके अंदर “सबसे शक्तिशाली आदिम-पशु प्रणाली” को जगा दिया। ऐसे युग में जहाँ हर कोई अपने पशु-साथियों को विकसित करता था, मो ने एक तुच्छ हरी इल्ली को आदिम रूप में लौटाकर सबसे शक्तिशाली पशु—आकाशीय ड्रैगन—में बदल दिया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

ड्रैगन और लड़के की अनोखी दोस्ती

एक विशाल नीला ड्रैगन और एक स्कूल यूनिफॉर्म पहने लड़का क्या जोड़ी है। पशु साथी सब विकसित हों मैं आदिम बनूँ में यह रिश्ता दिल को छू गया। जब ड्रैगन ने उसे अपनी पीठ पर बैठाया तो लगा जैसे दो अलग अलग दुनियाएं एक हो गई हों। उनकी आँखों में एक दूसरे के प्रति सम्मान और भरोसा साफ झलक रहा था।

होलोग्राम इंटरफेस का जादू

हवा में तैरते नीले होलोग्राम स्क्रीन देखकर लगा जैसे भविष्य अभी आ गया हो। पशु साथी सब विकसित हों मैं आदिम बनूँ की तकनीक और जादू का मिश्रण बेमिसाल है। जब उसने उंगली से हाँ बटन दबाया तो स्क्रीन से निकली रोशनी ने पूरे दृश्य को बदल दिया। ऐसा लगा जैसे मैं भी उस वर्चुअल दुनिया का हिस्सा बन गया हूँ।

भेड़ियों का खौफनाक हमला

अंधेरी गुफा से निकलते ही लाल आँखों वाले भेड़ियों का झुंड सामने आया दिल की धड़कन रुक सी गई। पशु साथी सब विकसित हों मैं आदिम बनूँ में यह दृश्य इतना तनावपूर्ण था कि मैं कुर्सी से उठ खड़ा हुआ। उनकी दहाड़ और लार टपकते मुंह देखकर लगा जैसे मौत सामने खड़ी हो। फिर भी वह लड़का डरा नहीं बस मुस्कुराया।

बर्फ और आग का महायुद्ध

जब नीले ड्रैगन ने बर्फ की सांस छोड़ी और लाल ड्रैगन ने आग उगली तो पूरी जमीन कांप उठी। पशु साथी सब विकसित हों मैं आदिम बनूँ का यह युद्ध दृश्य इतना भव्य था कि लगा जैसे दो देवता आमने सामने हों। बर्फ के टुकड़े हवा में तैर रहे थे और आग की लपटें आसमान छू रही थीं एक अद्भुत दृश्य।

आकाशगंगा के नीचे अकेलापन

जब वह अकेला खंभे के पास खड़ा था और ऊपर ऑरोरा बोरियलिस चमक रहा था तो एक अजीब सी शांति और उदासी महसूस हुई। पशु साथी सब विकसित हों मैं आदिम बनूँ में यह दृश्य इतना सुंदर था कि मैं रो पड़ा। उसकी आँखों में सवाल थे लेकिन चेहरे पर एक अटूट विश्वास। ऐसा लगा जैसे वह अपनी नियति को स्वीकार कर चुका हो।

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