उस योद्धा की आंखों में जब पसीना टपका, तो मैं भी सहम गया। ऐसा लगा जैसे वह अकेला ही पूरी सेना के सामने खड़ा हो। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे पल बहुत हैं जो दिल को छू लेते हैं। ड्रैगन की आंखों में चमक और इंसान के चेहरे पर डर – यह कॉन्ट्रास्ट कमाल का है।
जब वह लड़का अपने ड्रैगन के साथ बादलों को चीरता हुआ निकला, तो मैं भी उसके साथ उड़ रहा था ऐसा महसूस हुआ। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की एनिमेशन क्वालिटी इतनी शानदार है कि हर पल सिनेमाई लगता है। दूरी मापने वाला डिस्प्ले तो जैसे गेम का हिस्सा हो!
उस काले ड्रैगन के मुंह से निकलती आग और उसकी आंखों में छिपा गुस्सा – सब कुछ इतना भयानक था कि मैं स्क्रीन से पीछे हट गया। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में विलेन का डिजाइन सच में डरावना है। उसकी हर हिलचल में तबाही का अहसास होता है।
लड़के और उसके ड्रैगन के बीच का रिश्ता सिर्फ साथी का नहीं, बल्कि आत्मा का है। जब ड्रैगन घायल हुआ, तो लड़के की आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ यह बताता है कि सच्ची ताकत दोस्ती में होती है, न कि हथियारों में।
जब सेनाएं घिर गईं और नीली ढाल ने सबको घेर लिया, तो लगा जैसे अंतिम युद्ध शुरू हो गया हो। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में ऐसे सीन्स हैं जो दिल की धड़कन तेज कर देते हैं। हर सैनिक की आंखों में डर और हिम्मत दोनों दिख रहे थे।