सफेद जैकेट पहने लड़के और लड़की का स्टैंड बहुत ही प्रभावशाली था। भले ही उनके सामने दुश्मनों की फौज खड़ी थी, लेकिन उनके चेहरे पर डर नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प था। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में इन दोनों के बीच की केमिस्ट्री बहुत अच्छी लग रही है। लड़की के सफेद बाल और लड़के का गंभीर स्वभाव उन्हें बाकी भीड़ से अलग बनाता है। यह सीन दिखाता है कि वे हार मानने वालों में से नहीं हैं।
लंबे बालों वाले विलेन की मुस्कान देखकर ही समझ आ जाता है कि वह कितना चालाक और खतरनाक है। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी जो शैतानियत को दर्शाती है। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में विलेन का किरदार बहुत ही गहराई से लिखा गया है। जब उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया, तो लगा जैसे वह किसी जादू का इस्तेमाल करने वाला हो। उसका हर एक्सप्रेशन दर्शकों को बांधे रखता है।
पीछे खड़ी भीड़ के चेहरों पर जो डर साफ झलक रहा था, वह सीन की गंभीरता को बढ़ा देता है। वे सब पसीने से तर-बतर थे और कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में आम लोगों की प्रतिक्रिया को दिखाना बहुत जरूरी था ताकि खतरे का अंदाजा लगाया जा सके। यह दिखाता है कि सामने खड़े खलनायक कितने शक्तिशाली हैं कि सबकी बोलती बंद हो गई है।
जिस पात्र की आँखें सुनहरी थीं और चेहरे पर एक अलग ही तेज था, वह सबसे ज्यादा आकर्षक लगा। उसका अंदाज बहुत ही शाही और प्रभावशाली था। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ में इस पात्र का प्रवेश कहानी में एक नया मोड़ ला सकता है। उसने जब अपनी मुट्ठी भींची, तो लगा जैसे वह किसी बड़ी ताकत को बुला रहा हो। उसकी पर्सनालिटी में एक अलग ही वजन है जो दर्शकों को पसंद आएगा।
पूरा सीन रात के समय सेट किया गया है, जिससे माहौल में एक अजीब सी ठंडक और डर पैदा होता है। नीली रोशनी और काले पहाड़ों का बैकग्राउंड विजुअली बहुत स्ट्रांग है। पशु-साथी: सब विकसित हों, मैं आदिम बनूँ की सिनेमेटोग्राफी ने इस डार्क थीम को बहुत अच्छे से कैप्चर किया है। कोहरा और सूखे पेड़ यह बताते हैं कि यह जगह कितनी वीरान और खतरनाक है। नेटशॉर्ट पर ऐसे विजुअल्स देखना एक अलग ही अनुभव है।