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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मतवां16एपिसोड

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आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत

वीर सिंह जेल से जल्दी रिहा होकर भाई ध्रुव और भाभी प्रिया के साथ लौटा। रास्ते में अनिका रेड्डी की कार से टक्कर हो गई। अनिका ने पचास हज़ार रुपये की माँग कर दी। तारा को हॉस्पिटल पहुँचाने के लिए वीर रुक गया। उसने अनिका और उसके साथियों को हराया और उनका सहायक यश मल्होत्रा को बुलवाया। यश ने प्रिया को मुआवज़ा माँगा, जिससे वीर भड़क गया। फिर अर्जुन राठौर अपने लोगों के साथ आया। वीर ने अकेले ही सबको हरा दिया। तभी चेयरमैन शौर्य मल्होत्रा ने वीर को पहचानकर उसकी मदद की
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इस एपिसोड की समीक्षा

गिड़गिड़ाहट का असर

सफेद सूट वाले की गिड़गिड़ाहट देखकर दिल पसीज गया, लेकिन ग्रे शर्ट वाले के चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसा अनोखा मोड़ नहीं देखा था। फूलों वाली शर्ट वाले का घुटने टेकना असली हार की निशानी थी। सबकी सांसें जैसे रुकी हुई थीं और कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा था वहां। बहुत ही जबरदस्त अभिनय देखने को मिला। दर्शकों को पसंद आएगा।

खामोशी की चीख

ग्रे शर्ट वाले की खामोशी उस वक्त सबसे बड़ी चीख बनकर सामने आई। सफेद सूट वाला जमीन पर गिरकर माफ़ी मांग रहा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का ये दृश्य दिल दहला देने वाला है। पीछे खड़ी लड़कियों के चेहरे पर डर साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा था। कोई कुछ बोल नहीं रहा था बस देख रहा था। मोबाइल पर गुणवत्ता अच्छी थी। सबने देखा।

इज्जत का सवाल

काली जैकेट वाली दीदी ने जब बात की, तो पूरा माहौल एकदम से बदल गया। ग्रे शर्ट वाले ने बिना कुछ कहे रास्ता लिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में इज्जत का सवाल था। फूलों वाली शर्ट वाला शर्मिंदा खड़ा था। ये बदला नहीं, सबक था जो उसे मिला। कहानी बहुत गहरी है। लोग इसे जरूर देखें।

नाटकीय अंदाज़

सफेद सूट वाले के हाथ जोड़ने का अंदाज़ काफ़ी नाटकीय लगा। ग्रे शर्ट वाले ने एक बार भी पलक नहीं झपकाई। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी यहाँ नए मोड़ पर है। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन बने रहे। सजा मिलनी चाहिए थी और मिली। वीडियो साफ़ था। अनुभव अच्छा रहा।

भावनात्मक पल

घुटनों के बल बैठकर माफ़ी मांगना आसान नहीं होता। फूलों वाली शर्ट वाले की आंखों में आंसू थे। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ये सबसे भारी दृश्य है। ग्रे शर्ट वाले का रवैया काबिले तारीफ है। उसने मौका दिया लेकिन नहीं लिया। भावनात्मक दृश्य है। दिल को छू गया।

दमदार संवाद

सफेद सूट वाला बार बार सिर झुका रहा था। ग्रे शर्ट वाले ने मुंह नहीं खोला। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का अंत ऐसा ही होना चाहिए था। पीछे खड़ी सफेद कोट वाली लड़की चुपचाप देख रही थी। सब खत्म हो गया। संवाद दमदार थे। बहुत प्रभावशाली लगा।

जीत का चलना

काली कोट वाली ने जब कंधे पर हाथ रखा, तो लगा सब ठीक हो गया। ग्रे शर्ट वाले ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ये चलना जीत था। सफेद सूट वाला वहीं का वहीं रह गया। रास्ता साफ़ हो गया। संपादन अच्छा है। मज़ा आ गया।

तनावपूर्ण माहौल

फूलों वाली शर्ट वाले का सोना चेहरा उतर चुका था। ग्रे शर्ट वाले की आंखों में ठंडक थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ये पल याद रहेगा। सफेद सूट वाला चीख रहा था पर आवाज़ नहीं निकली। माहौल बहुत तनावपूर्ण था। आवाज़ ठीक थी। रोमांचक था।

असली फिल्मांकन

सब लोग घेरा बनाकर खड़े थे। ग्रे शर्ट वाले बीच में खड़ा था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का फिल्मांकन बहुत असली लगा। सफेद सूट वाले की हालत खराब थी। कोई हंसा नहीं, सब गंभीर थे। ये मज़ाक नहीं था। कहानी अच्छी है। बिल्कुल असली लगा।

संतोषजनक अंत

अंत में जब सब चल दिए, तो सफेद सूट वाला अकेला रह गया। ग्रे शर्ट वाले ने पीछे मुड़कर देखा तक नहीं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का संदेश साफ़ है। गलती की सजा मिलनी चाहिए। ये अंत बहुत संतोषजनक लगा। कहानी देखनी चाहिए। बहुत अच्छा लगा।