लड़ाई के दृश्य बहुत जबरदस्त हैं। भूरे जैकेट वाले लड़के की कसरत देखकर दांतों तले उंगली दबानी पड़ती है। गोदाम का माहौल काफी तनावपूर्ण बनाया गया है। सांप वाली शर्ट वाले गुंडे का अहंकार टूटते हुए देख मजा आया। इस शो आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में हर पल रोमांच बना रहता है। छवि के कोण भी लड़ाई के दौरान बहुत बदलते हैं। दर्शक को बिल्कुल वहां मौजूद होने का अहसास होता है। मारपीट पसंद करने वालों के लिए यह दृश्य किसी दावत से कम नहीं है। बिल्कुल देखने लायक है।
कुर्सी पर बंधे हुए शख्स की आंखों में डर साफ दिख रहा था। भूरे जैकेट वाले ने बिना ज्यादा बोले सीधा हमला शुरू कर दिया। यह खामोशी उसके गुस्से को और बढ़ा रही थी। सांप वाली शर्ट वाले गुंडे को चाकू निकालते देख थोड़ा डर लगा था। लेकिन नायक ने स्टाइलिश तरीके से उसे बेअसर कर दिया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी में यह टर्निंग पॉइंट लगता है। गुंडों की भीड़ को अकेले ही सब संभाल लिया। सच में बहादुरी देखने लायक है।
गोदाम की रोशनी और सजावट बहुत ही रहस्यमयी है। एक रोशनी लटक रही है और चारों तरफ सामान पड़ा है। गुलाबी आरामकुर्सी वहां अजीब लग रही थी पर दृश्य को रंग दे रही है। फूलों वाली शर्ट वाले गुंडे को एक किक में गिरा दिया गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं। संवाद कम हैं लेकिन लड़ाई बहुत ज्यादा है। यह शैली मुझे बहुत पसंद आ रही है। हर किरदार का अपना अंदाज है।
खलनायक के चेहरे पर निशान है और वह काफी घमंडी लग रहा था। उसने चाकू निकाला तो लगा अब मुश्किल होगी। पर भूरे जैकेट वाले ने छड़ी का इस्तेमाल करके हथियार गिरा दिया। यह पल सबसे बेहतरीन था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में लड़ाई के साथ भावनाएं भी हैं। बंधे हुए व्यक्ति की मदद करने का जज्बा साफ दिख रहा है। गुंडों की भीड़ को अकेले ही सब संभाल लिया। सच में बहादुरी देखने लायक है।
शुरुआत में बातचीत हो रही थी फिर अचानक मारपीट शुरू हो गई। यह अचानक बदलाव दर्शकों को बांधे रखता है। छवि की हलचल लड़ाई के साथ बहुत तालमेल बैठा रही है। सांप वाली शर्ट वाले का गुस्सा देखने लायक था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की रफ्तार बहुत तेज है। कोई भी दृश्य बोरिंग नहीं है। भूरे जैकेट वाले की फिटनेस और ताकत भी तारीफ के लायक है। वह थकता नहीं है बस लड़ता जाता है।
बंधे हुए शख्स के मुंह में कपड़ा था और वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसकी बेबसी देखकर गुस्सा आ रहा था। फिर भूरे जैकेट वाले ने सबको सबक सिखाया। फूलों वाली शर्ट वाले को डिब्बे के साथ गिराया गया। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ऐसे नाटकीय पल बहुत हैं। सेट बनाने वाले ने गोदाम को बहुत असली बनाया है। धूल और अंधेरा माहौल खतरनाक लग रहा है। यह रोमांच पसंद करने वालों के लिए बेस्ट है।
नायक की एंट्री बहुत शांत थी लेकिन उसकी आंखों में आग थी। उसने पहले गुंडों को निपटाया फिर मुखिया की बारी आई। चाकू और छड़ी वाले संघर्ष में लड़ाई बहुत तेज थी। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की यह कड़ी बहुत यादगार है। खलनायक के गिरने के बाद का चेहरा बहुत मजेदार था। उसे लगा था वह जीत जाएगा पर हार गया। ऐसे मोड़ कहानी को आगे बढ़ाते हैं। मुझे अगला भाग देखने की जल्दी है।
गोदाम में बिखरा हुआ सामान और पुराने फर्नीचर का इस्तेमाल अच्छा है। लड़ाई के दौरान कई चीजें टूटती हैं। भूरे जैकेट वाले ने एक किक से आरामकुर्सी पर गिरा दिया। यह ताकत दिखाता है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में कसरत बहुत उच्च स्तर की है। कोई भी नकल नहीं लग रहा है। सब कुछ असली और कच्चा लग रहा है। यह वीडियो देखकर जोश बढ़ जाता है। बिल्कुल शानदार प्रदर्शन है।
खलनायक समूह के कपड़े काफी रंगीन और अलग हैं। किसी ने फूलों वाली शर्ट पहनी है तो किसी ने छलावरण वाली। भूरे जैकेट वाला सिंपल कपड़ों में भी सबसे अलग लग रहा है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में पोशाक डिजाइन भी ध्यान देने लायक है। लड़ाई के बीच में भी कपड़े खराब नहीं हुए। यह संघर्ष दृश्य बहुत ही साफ सुथरा है। दर्शक को हर हलचल साफ दिखता है। निर्देशन बहुत सटीक है।
अंत में जब खलनायक जमीन पर गिरा तो जीत की खुशी थी। भूरे जैकेट वाले ने छड़ी पकड़कर खड़ा होना दिखाया। बंधे हुए शख्स की जान बच गई है। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का यह अंत बहुत संतोषजनक है। न्याय हुआ है और बुराई हारी है। ऐसे दृश्य देखकर अच्छा लगता है। नायक बिना डरे सबका सामना करता है। यह वीडियो मुझे बहुत पसंद आया और मैं इसे दोबारा देखूंगा।