ग्रे ड्रेस वाली लड़की का दर्द साफ दिख रहा था। उसने सब कुछ समझाने की कोशिश की पर वो भूरे स्वेटर वाला सुनने को तैयार नहीं था। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में भरोसे के टूटने का ये सीन दिल को छू गया। उसकी आँखों में आँसू देखकर बुरा लगा। सच्ची भावनाएँ बिना डायलॉग के भी बयां हो गईं। बहुत ही दमदार एक्टिंग थी इस पार्ट में।
भूरे स्वेटर वाले का गुस्सा डरावना था। उसने फाइल छीन ली और कागजात देखकर चौंक गया। शायद उसे धोखा लगा हो, लेकिन तरीका गलत था। इस शो में रिश्तों की खटास को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। हर एक्सप्रेशन में कहानी छिपी हुई है। देखने वाले को खुद को उस स्थिति में महसूस होगा।
सफेद कपड़ों वाली सहेली का रोल बहुत अहम था। मुसीबत में वही साथ खड़ी रही। दोस्ती की निभाई आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में खूबसूरती से दिखाई गई है। जब सब साथ छोड़ दें तो एक सच्चा दोस्त ही सहारा बनता है। उसका शांत रहना और दोस्त को संभालना काबिले तारीफ है। ऐसे किरदार कहानी को संतुलित रखते हैं।
फाइल खोलने से पहले का सन्नाटा बहुत भारी था। ऐसा लग रहा था कि कोई बड़ा धमाका होने वाला है। डायरेक्शन इतना अच्छा था कि साँसें रुक गईं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में टेंशन बनाए रखना आसान नहीं था। बिना शोर मचाए इतना ड्रामा बनाना हुनर की बात है। हर फ्रेम में एक अलग ही एनर्जी थी जो बांधे रखती है।
कभी कभी शब्दों की जरूरत नहीं होती। ग्रे आउटफिट वाली की आँखों ने सब कह दिया। वो चीख नहीं रही थी पर उसका दर्द चिल्ला रहा था। इस वेब सीरीज में भावनाओं को बिना बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया है। रियलिस्टिक लगता है क्योंकि ऐसे झगड़े घर घर में होते हैं। एक्टर्स ने अपने किरदारों में जान फूंक दी है।
उस फाइल में आखिर क्या था? तलाक के कागज या कोई और राज? ये सवाल दिमाग में घूम रहा है। कहानी में सस्पेंस बनाए रखना जरूरी है और आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में ये कामयाब हुआ है। अगला एपिसोड कब आएगा इसका इंतज़ार है। प्लॉट ट्विस्ट ने सबको हैरान कर दिया। बहुत ही रोचक मोड़ लिया कहानी ने।
लिविंग रूम का सेटिंग बहुत रिलेटेबल लगा। ये कोई महल नहीं बल्कि एक आम घर है। ऐसे माहौल में झगड़े ज्यादा चुभते हैं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत की कहानी जमीन से जुड़ी हुई है। जब अपने ही घर में सुकून न मिले तो इंसान टूट जाता है। डिटेलिंग पर बहुत ध्यान दिया गया है। दीवारों की पेंटिंग से लेकर सोफे तक सब सही था।
जब उसने फाइल वापस छीनने की कोशिश की तो दिल दहल गया। इतनी बेबसी किसी की आँखों में नहीं देखी। ये सीन आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत का हाईलाइट था। ताकतवर व्यक्ति भी कभी कमजोर पड़ जाता है। उसकी चीखें सुनकर रूह कांप गई। एक्टिंग इतनी नेचुरल थी कि लगा असल जीवन का कोई किस्सा हो। बहुत प्रभावशाली दृश्य था।
ये कोई आम रोमांटिक ड्रामा नहीं है। इसमें गंभीर मुद्दों को उठाया गया है। रिश्तों की मजबूरी और मजबूरियाँ साफ दिखीं। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत देखकर सोचने पर मजबूर हो गए। कलाकारों के चेहरे के भाव बदलते रहे। गुस्सा, दुख, हैरानी सब कुछ एक साथ था। ऐसे कंटेंट की जरूरत है जो मनोरंजन के साथ कुछ दे जाए।
अगर आपको इंटेंस फैमिली ड्रामा पसंद है तो ये जरूर देखें। कहानी में दम है और एक्टिंग में जान। आज छूटा हूँ, आज ही उलझा मत में वक्त बर्बाद नहीं होगा। हर एपिसोड के बाद नया खुलासा होता है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव भी अच्छा रहा। क्वालिटी और स्टोरी दोनों ही लेवल की हैं। बिल्कुल निराश नहीं होंगे आप।