यह दृश्य वाकई दिलचस्प है जहां एक आधुनिक पार्किंग में प्राचीन तलवारबाजी देखने को मिलती है। लाल साड़ी वाली महिला की आंखों में डर और गुस्सा दोनों साफ झलक रहे हैं। सफेद पोशाक वाला व्यक्ति अपने घायल होने के बावजूद तलवार पकड़े हुए है। तलवार का नाद इस दृश्य में बहुत ही रोमांचक लग रहा है। नीली रोशनी वाली तलवार का आना तो जैसे किसी जादू जैसा लगता है।
क्या बात है! आधुनिक कपड़ों में युवक और प्राचीन वेशभूषा में अन्य किरदारों का यह मिलन अद्भुत है। डेनिम जैकेट वाला युवक जब नीली चमकदार तलवार निकालता है तो पूरा माहौल बदल जाता है। तलवार का नाद इस संघर्ष में नया मोड़ लाता है। पार्किंग की ठंडी रोशनी और तलवारों की चमक का कॉन्ट्रास्ट बहुत अच्छा लग रहा है।
इस दृश्य में हर किरदार की भावनाएं साफ दिखाई दे रही हैं। महिला की चिंतित मुद्रा, घायल योद्धा का संकल्प और आधुनिक युवक का रहस्यमयी आगमन - सब कुछ बहुत ही नाटकीय है। तलवार का नाद जब गूंजता है तो लगता है जैसे समय थम गया हो। यह दृश्य दर्शकों को बांधे रखने में सफल है।
नीली चमकदार तलवार का विजुअल इफेक्ट वाकई शानदार है। जब डेनिम जैकेट वाला युवक अपनी तलवार निकालता है तो पूरा दृश्य जादुई हो जाता है। तलवार का नाद इस जादू को और भी रोमांचक बना देता है। पार्किंग की साधारण जगह को इस तरह से फिल्माना निर्देशक की कलाकारी है।
हर किरदार की अपनी एक कहानी लगती है। लाल साड़ी वाली महिला क्यों डरी हुई है? सफेद पोशाक वाला योद्धा क्यों घायल है? और यह आधुनिक युवक कौन है जो इतनी आसानी से जादुई तलवार चलाता है? तलवार का नाद इन सभी सवालों को और भी रोचक बना देता है।