शुरुआत में ही काले कपड़ों वाले शख्स की एंट्री ने माहौल को गंभीर कर दिया। उसके माथे पर बना निशान और गुस्से से भरी आंखें बता रही थीं कि यह कोई साधारण मेहमान नहीं है। जब उसने चिल्लाना शुरू किया, तो लगा जैसे किसी पुराने बदले की आग सुलग रही हो। तलवार का नाद सुनकर लगता है कि यह जंग सिर्फ शब्दों की नहीं, बल्कि ताकत की भी होगी। दृश्य की भव्यता और पात्रों का डरना सब कुछ सही बैठा है।
सफेद यूनिफॉर्म पहनी महिला का चेहरा देखकर लगता है कि वह किसी बड़ी जिम्मेदारी को संभाल रही हैं। उनकी आंखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चिंता है। जब वह सामने खड़ी होती हैं, तो लगता है कि वह इस तूफान को रोकने की आखिरी उम्मीद हैं। उनके पीछे खड़े सैनिक और उनका तेवर बता रहे हैं कि यह मुकाबला आसान नहीं होगा। तलवार का नाद के इस सीन में उनकी मौजूदगी सबसे अहम है।
लाल साड़ी में लिपटी महिला को जब उस भारी-भरकम आदमी ने पकड़ रखा है, तो उसकी आंखों में बेबसी साफ दिख रही है। वह न तो चिल्ला रही है और न ही भागने की कोशिश कर रही है, बस चुपचाप सब सह रही है। यह खामोशी शोर से ज्यादा डरावनी लग रही है। लगता है कि उस पर कोई बड़ा दबाव है या फिर वह किसी की जान बचाने के लिए यह सब सह रही है। तलवार का नाद में ऐसे इमोशनल सीन्स दिल को छू लेते हैं।
सुनहरी गाउन पहनी युवती का चेहरा देखकर लगता है कि वह किसी अनहोनी की गवाह बन गई है। उसकी आंखों में सवाल हैं, लेकिन जुबान पर ताला लगा है। जब वह उस सफेद वर्दी वाली महिला के पास खड़ी होती है, तो लगता है कि दोनों के बीच कोई गहरा राज छिपा है। महल जैसी जगह और इतने सारे गनमैन देखकर लगता है कि यह कोई आम पार्टी नहीं, बल्कि कोई बड़ी साजिश है। तलवार का नाद का यह मोड़ बहुत रोचक है।
काले सूट और चश्मे पहने उन गुंडों को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वे बिना किसी भाव के खड़े हैं, जैसे मशीन हों। जब वे सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं, तो लगता है कि मौत चल रही है। उनकी मौजूदगी ही बता रही है कि सामने वाले का कद कितना बड़ा है। तलवार का नाद में ऐसे विलेन कैरेक्टर्स कहानी को और भी दिलचस्प बना देते हैं। इनका खामोश रहना सबसे ज्यादा डरावना है।