जब सफेद सूट पहने शख्सियत ने एंट्री ली, तो पूरा माहौल बदल गया। तलवार का नाद में ऐसे पल बहुत कम आते हैं जहाँ सिर्फ चलने का अंदाज ही कहानी बता दे। उसकी आँखों में ठंडक थी, लेकिन कदमों में गर्मी। लगता है अब खेल बदलने वाला है।
दुल्हन ने कुछ नहीं कहा, बस बाँहें बाँधकर खड़ी रही। तलवार का नाद में ये छोटी-छोटी चुप्पियाँ बड़े धमाके करती हैं। उसकी आँखों में गुस्सा था या डर? शायद दोनों। जब तक वो बोलेगी नहीं, तब तक सब कुछ अधूरा लगेगा।
काले कोट में सुनहरी कढ़ाई वाला शख्सियत देखकर लगा जैसे कोई पुराना राजा लौट आया हो। तलवार का नाद में ऐसे किरदार हमेशा कुछ छुपाते हैं। उसके हाथ में माला थी, लेकिन आवाज में गर्जन। क्या वो दोस्त है या दुश्मन?
नीले सूट वाला शख्सियत जब आगे बढ़ा, तो लगा जैसे कोई नेता भाषण देने वाला हो। तलवार का नाद में ऐसे पल बहुत तनावपूर्ण होते हैं। उसके चेहरे पर गंभीरता थी, लेकिन आँखों में चमक। क्या वो सच बोल रहा था या नाटक कर रहा था?
सुनहरी गाउन और ताज पहने शख्सियत देखकर लगा जैसे कोई रानी महल से उतर आई हो। तलवार का नाद में ऐसे दृश्य बहुत शाही लगते हैं। उसके चेहरे पर गंभीरता थी, लेकिन आँखों में चमक। क्या वो सच बोल रही थी या नाटक कर रही थी?