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नकली का 250, असली का खेलवां16एपिसोड

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नकली का 250, असली का खेल

रणवीर मेहता, मेहता ग्रुप का असली बेटा, बिछड़ने के बाद घर लौटता है। वह परिवार के लिए जान लगा देता है और कंपनी को सालाना तीस हज़ार करोड़ दिलाता है, लेकिन सालाना जश्न पर नकली बेटा सिद्धांत उसे सिर्फ 250 युआन का बोनस देकर बेइज्जत करता है और उसके अपने माता-पिता व बहन भी नकली का साथ देते हैं। अब रणवीर का धैर्य टूट चुका है, वह घर छोड़कर मेहता ग्रुप को सबक सिखाने की तैयारी करता है। क्या रणवीर अपने ही परिवार को हरा पाएगा? और यह लड़ाई कहाँ तक जाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे का खेल और चेहरे के भाव

झांग मिंग के चेहरे पर वो मुस्कान देखकर ही समझ जाते हैं कि कुछ गड़बड़ है। जब वो सूटकेस खोलता है और नोटों की गड्डियां दिखाई देती हैं, तो सस्पेंस अपने चरम पर होता है। इस शो नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में हर डील के पीछे एक बड़ा राज छिपा है। वाइन का ग्लास हाथ में है लेकिन नज़रें सिर्फ पैसों पर टिकी हैं। ये सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि आखिरकार ये सौदा किस बात का है। झांग मिंग की चालाकी और सामने वाले की चुप्पी सब कुछ कह रही है। बिजनेस की दुनिया में भरोसा करना कितना मुश्किल है, ये ड्रामा बहुत खूबसूरती से दिखाता है। हर एक्टिंग में दम है।

लेब की गंभीरता और रिसर्च

चेन शुचेंग की लेब में एकाग्रता देखकर हैरानी होती है। वो ब्लूप्रिंट्स पर इतना ध्यान दे रहे हैं जैसे दुनिया की कोई परवाह ही न हो। झांग मिंग खड़ा होकर रिपोर्ट दे रहा है लेकिन चेन की आंखों में सिर्फ रिसर्च दिखाई देती है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल की कहानी में ये साइंटिफिक एंगल बहुत इंटरेस्टिंग लग रहा है। क्या ये रिसर्च किसी बड़े खतरे को टालने के लिए है या फिर कुछ और मकसद है। लैब का माहौल और सफेद कोट में चेन की पर्सनालिटी बहुत इंप्रेसिव है। डायलॉग्स कम हैं लेकिन एक्सप्रेशन सब बता रहे हैं। विज्ञान और व्यापार के बीच का संघर्ष देखने लायक है।

रेस्तरां का क्लासी माहौल

वेस्टर्न रेस्तरां का सीन बहुत ही क्लासी है। वहां तीन लोग बैठे हैं और वाइन पी रहे हैं। सफेद सूट वाला शख्स बहुत अमीर लग रहा है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में हर लोकेशन बदलने के साथ कहानी में नया मोड़ आता है। महिला के कानों में झुमके और उसका अंदाज बता रहा है कि वो साधारण नहीं है। टेबल पर खाना है लेकिन बातचीत कुछ और ही चल रही होगी। कैमरा एंगल्स बहुत शानदार हैं जो हर चेहरे के भाव को कैप्चर करते हैं। ये डिनर डेट नहीं बल्कि कोई स्ट्रैटेजिक मीटिंग लग रही है। सबके बीच की केमिस्ट्री देखकर मजा आ रहा है।

सूटकेस और खामोशी

जब वो काला सूटकेस टेबल पर रखा जाता है तो माहौल बदल जाता है। झांग मिंग की उंगलियां कांप रही हैं या फिर ये सिर्फ मेरा वहम है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में ऐसे प्रॉप्स का इस्तेमाल कहानी को आगे बढ़ाता है। लाल रंग के नोट गिनते वक्त जो आवाज आती है वो सन्नाटे को चीर देती है। दोनों के बीच की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। क्या ये रिश्वत है या फिर किसी रिसर्च की फंडिंग। चेन शुचेंग का नाम सुनकर ही समझ आता है कि ये कोई साधारण डील नहीं है। हर सीन में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

कपड़े और पर्सनालिटी

झांग मिंग के कपड़े और उसका स्टाइल बहुत ही अमीराना है। वो सिर्फ एक असिस्टेंट नहीं लग रहा बल्कि कोई बड़ा खिलाड़ी है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में किरदारों की ड्रेसिंग भी उनकी पर्सनालिटी बताती है। जब वो हंसता है तो लगता है कि उसने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली है। सामने वाले शख्स की चुप्पी उसे और भी रहस्यमयी बना रही है। रेस्तरां का प्राइवेट रूम बहुत लग्जरी है जहां कोई तीसरा इंसान नहीं है। ये गोपनीयता बताती है कि बातचीत कितनी संवेदनशील है। मुझे ये देखना है कि आखिर में कौन किसको धोखा देता है।

ऑफिस का सीरियस माहौल

चेन शुचेंग जब लेब कोट में होते हैं तो उनकी ऑथोरिटी बढ़ जाती है। वो कागजों पर कुछ लिख रहे हैं जो शायद भविष्य बदल सकता है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बहुत स्मार्ट तरीके से किया गया है। झांग मिंग खड़ा होकर इंतजार कर रहा है कि कब वो सर उठाएं। ऑफिस का माहौल बहुत सीरियस है और दीवारों पर लगी पेंटिंग्स भी कुछ कहानी कह रही हैं। ये सिर्फ एक ऑफिस नहीं बल्कि कोई मिशन कंट्रोल रूम लग रहा है। हर डिटेल पर ध्यान दिया गया है जो प्रोडक्शन की क्वालिटी दिखाता है।

वाइन ग्लास की टकराहट

रेस्तरां में वाइन ग्लास की टकराहट से सीन की शुरुआत होती है। ये आवाज ही बता देती है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में छोटी-छोटी आवाजों का भी इस्तेमाल मूड बनाने के लिए किया गया है। महिला के चेहरे पर स्माइल है लेकिन आंखों में सवाल हैं। सफेद सूट वाला शख्स बहुत कॉन्फिडेंट लग रहा है। ये तीनों के बीच का समीकरण बहुत पेचीदा लग रहा है। क्या ये सभी एक ही टीम का हिस्सा हैं या अलग-अलग एजेंडे हैं। मुझे अगला एपिसोड देखने की बेसब्री है।

लालच और असली खेल

सूटकेस में छिपा हुआ पैसा देखकर हर किसी की सांसें रुक जाती हैं। इतनी बड़ी रकम एक जगह देखना आसान नहीं होता। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में ऐसे सीन्स दर्शकों को झटका देने के लिए काफी हैं। झांग मिंग की खुशी देखकर लगता है कि उसका काम हो गया है। लेकिन चेन शुचेंग की गंभीरता बताती है कि असली खेल अब शुरू होगा। पैसा सिर्फ एक जरिया है मकसद कुछ और है। ये ड्रामा हमें बताता है कि लालच इंसान को कहां ले जा सकता है। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि लगता है सब असली है।

ब्लूप्रिंट्स का राज

चेन शुचेंग की लेब में जो ब्लूप्रिंट्स हैं वो बहुत जटिल लग रहे हैं। शायद ये कोई नई मशीन या तकनीक है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहानी को मजबूत बनाता है। झांग मिंग के कपड़ों का पैटर्न और टाई पिन भी बहुत कीमती लग रहे हैं। ये छोटी डिटिल्स किरदार की अमीरी दिखाती हैं। जब वो बात करते हैं तो उनकी आवाज में वजन है। ऑफिस की लाइटिंग भी बहुत ड्रामेटिक है जो तनाव बढ़ाती है। मुझे ये पता लगाना है कि आखिर ये रिसर्च किस काम आएगी।

क्लाइमेक्स की तैयारी

अंत में जब सभी वाइन पीते हैं तो लगता है कि डील फाइनल हो गई है। लेकिन चेहरों के भाव बता रहे हैं कि ये अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। नकली का दो सौ पचास, असली का खेल का क्लाइमेक्स बहुत ही धमाकेदार होने वाला है। हर किरदार अपने आप में एक पहेली है। झांग मिंग की चालाकी और चेन शुचेंग की होशियारी देखने लायक है। रेस्तरां से लेकर लेब तक का सफर बहुत रोमांचक है। ये शो सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं बल्कि थोड़ा सोचने पर मजबूर भी करता है। मुझे ये सीरीज बहुत पसंद आ रही है और मैं आगे क्या होता है ये देखना चाहता हूं।