ग्रे सूट वाले व्यक्ति की आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। जैसे ही उसने चिल्लाना शुरू किया, पूरा हॉल सन्न रह गया। यह दृश्य बताता है कि कहानी में कितना बड़ा संघर्ष छिपा है। नकली का २५०, असली का खेल देखकर लगता है कि असली धोखा तो अभी बाकी है। हर हावभाव में बेचैनी थी। लोग बस देख रहे थे। कोई कुछ बोल नहीं रहा था। यह चुप्पी सबसे ज्यादा डरावनी थी। सबको अपनी बारी का इंतजार था।
सफेद कोट वाला शख्स बहुत चालाक लग रहा था। उसके चश्मे के पीछे की चालाकी हर किसी को बेवकूफ बना रही थी। उसने जैसे ही हाथ हिलाए, सबकी नजरें उस पर टिक गईं। इस शो में हर किरदार की अपनी मजबूरी है। नकली का २५०, असली का खेल की कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है। वह सबको समझा रहा था। लेकिन कोई उसकी बात मानने को तैयार नहीं था। माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा था।
सुनहरी पोशाक वाली शख्सियत की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। उसके चेहरे पर हैरानी और डर दोनों साफ झलक रहे थे। जब तक वह कुछ बोलती, माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया। ऐसे ड्रामे में भावनाओं का खेल ही असली हथियार होता है। नकली का २५०, असली का खेल में यही तो देखने को मिलता है। वह बहुत सुंदर लग रही थी। लेकिन उसकी आंखें रो रही थीं। सब कुछ खत्म होता दिख रहा था।
काले सूट वाले व्यक्ति की खामोशी सबसे खतरनाक थी। वह बिना कुछ बोले सब कुछ समझ रहा था। जब उसने उंगली से इशारा किया, तो लगता था जैसे फैसला सुना दिया हो। यह पावर डायनामिक बहुत ही शानदार ढंग से दिखाया गया है। नकली का २५०, असली का खेल का हर सीन सस्पेंस से भरा है। वह बहुत शांत था। लेकिन उसकी आंखों में आग थी। सब डर रहे थे उससे।
काली पोशाक वाली युवती की आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों थे। उसके गहने चमक रहे थे लेकिन चेहरा उतरा हुआ था। जब किसी ने उसकी कलाई पकड़ी, तो लगा कहानी में नया मोड़ आ गया है। ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। नकली का २५०, असली का खेल में यही ट्विस्ट सबसे खास है। वह भागना चाहती थी। लेकिन रास्ता बंद था। सब तरफ दीवारें थीं।
पार्टी का माहौल इतना खूबसूरत था लेकिन बातचीत में जहर घुला हुआ था। मेज पर रखी शराब की बोतलें भी इस तनाव को कम नहीं कर पा रही थीं। हर कोई एक दूसरे को शक की नजर से देख रहा था। नकली का २५०, असली का खेल में दिखाया गया यह समाज बहुत रंगीन है। फूल भी मुरझा रहे थे। सब कुछ नकली लग रहा था। असली कोई नहीं था वहां।
भूरे सूट वाले व्यक्ति ने जब हाथ ऊपर उठाया, तो सबकी सांसें रुक गईं। यह एक्शन किसी चेतावनी से कम नहीं था। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन बने हुए थे। इस शो में हर छोटी हरकत मायने रखती है। नकली का २५०, असली का खेल की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। वह जीतना चाहता था। लेकिन हार उसका इंतजार कर रही थी। खेल बड़ा खतरनाक था।
कैमरा एंगल्स ने हर किरदार के एक्सप्रेशन को बहुत बारीकी से पकड़ा है। जब ग्रे सूट वाला चिल्ला रहा था, तो बैकग्राउंड ब्लर था जिससे फोकस बना रहा। यह तकनीकी बारीकी कहानी को और भी गहरा बनाती है। नकली का २५०, असली का खेल की प्रेजेंटेशन बहुत प्रीमियम है। रोशनी भी डरावनी थी। छायाएं लंबी हो रही थीं। सब कुछ अजीब लग रहा था।
अंत में जब स्क्रीन पर लिखा आया, तो दिल में एक अजीब सी बेचैनी हो गई। अधूरी कहानी सबसे ज्यादा परेशान करती है। अब अगले एपिसोड का इंतजार नहीं हो रहा है। ऐसे क्लिफहैंगर दर्शकों को मजबूर करते हैं। नकली का २५०, असली का खेल का अगला भाग कब आएगा। हमें जवाब चाहिए। सब कुछ अधूरा लग रहा था। रात भर नींद नहीं आएगी।
सभी किरदारों के कपड़े और स्टाइल बहुत महंगे लग रहे थे। यह दिखाता है कि यह कहानी अमीरों की दुनिया की है। लेकिन अमीरी के पीछे की गंदगी सबके सामने आ रही थी। नकली का २५०, असली का खेल में यही असलीयत दिखाई गई है। बहुत ही दमदार परफॉरमेंस था। हीरे जवाहरत चमक रहे थे। दिल काले पड़ रहे थे। सब झूठ था।